स्पेन-फ्रांस सेमीफाइनल: लामिन यमाल का हैंडबॉल विवाद, जानिए क्यों सही था रेफरी का फैसला
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फीफा वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में स्पेन और फ्रांस के बीच हुए मुकाबले में 22वें मिनट में मिली पेनल्टी ने फुटबॉल जगत में हलचल मचा दी। सोशल मीडिया पर लामिन यमाल के हैंडबॉल को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई थी। चलिए समझते हैं कि रेफरी का फैसला नियमों के आधार पर क्यों सही था।

विवाद की जड़: क्या था मामला? मैच के 22वें मिनट में स्पेन हमला कर रहा था। लामिन यमाल गेंद तक पहुंचने के लिए कूदे, तभी गेंद उनकी बाजू से टकराई और लुकास डिग्ने का पैर यमाल से टकरा गया। रेफरी ने तुरंत फाउल का इशारा करते हुए स्पेन को पेनल्टी दे दी, जिससे मिकेल ओयारजाबाल ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी।

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस? फैसले के तुरंत बाद इंटरनेट पर वीडियो वायरल हो गए। प्रशंसकों का दावा था कि यमाल ने गेंद को हाथ से नियंत्रित किया था, इसलिए यह हैंडबॉल होना चाहिए था और पेनल्टी रद्द होनी चाहिए थी। इसी दावे के चलते यह फैसला पूरे मैच की सबसे बड़ी चर्चा बन गया।

पूर्व फीफा रेफरी ने दी सफाई नियम विशेषज्ञ और पूर्व फीफा रेफरी क्रिस्टीना अनकेल ने इस भ्रम को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिप्ले में साफ है कि गेंद यमाल की जर्सी की स्लीव (आस्तीन) से लगी थी। फुटबॉल के नियमों के अनुसार, स्लीव का हिस्सा हाथ (Arm) की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए इसे हैंडबॉल नहीं माना जा सकता।

VAR का दखल क्यों नहीं? नियमों के अनुसार, VAR तभी हस्तक्षेप करता है जब रेफरी से कोई गंभीर गलती हुई हो। चूंकि गेंद स्लीव से लगी थी, इसलिए नियम के मुताबिक कोई हैंडबॉल अपराध नहीं हुआ। ऐसे में पेनल्टी रद्द करने का कोई तकनीकी आधार नहीं था। साथ ही, डिग्ने द्वारा किया गया संपर्क फाउल की श्रेणी में आता था।

फाइनल की ओर स्पेन शुरुआती गोल के बाद स्पेन ने मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। दूसरे हाफ में पेड्रो पोरो के गोल ने 2-0 से जीत पक्की कर दी। इस हार के साथ ही डिडिएर डेसचैम्प्स के नेतृत्व वाली फ्रांस का विश्व कप सफर समाप्त हो गया। अब स्पेन का मुकाबला फाइनल में इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा।

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