ग्लोबल डिफेंस मार्केट में भारत का दबदबा: ब्रह्मोस मिसाइल के लिए मची दुनिया भर में होड़
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नई दिल्ली: ग्लोबल डिफेंस इंडस्ट्री में भारत की पहचान अब केवल एक आयातक देश की नहीं, बल्कि एक प्रमुख रक्षा निर्यातक (Defence Exporter) के रूप में स्थापित हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया जकार्ता दौरे के दौरान इंडोनेशिया ने आधिकारिक तौर पर भारत की घातक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की पुष्टि कर दी है।

यह भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत है। रक्षा निर्यात के क्षेत्र में यह कदम भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

ब्रह्मोस के लिए बढ़ती वैश्विक कतार

ब्रह्मोस को अपनी सेना का हिस्सा बनाने के लिए दुनिया भर में होड़ मची है। साल 2022 में फिलीपींस भारत की इस मिसाइल प्रणाली को खरीदने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय देश बना था। अब इंडोनेशिया इस लिस्ट में शामिल हो गया है, जबकि वियतनाम के साथ भी डील अंतिम चरण में है।

ब्रह्मोस की मारक क्षमता से प्रभावित होकर कई अन्य देश भी बातचीत कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत के आकाशतीर (Akashteer) एयर डिफेंस सिस्टम को खरीदने के लिए गंभीर चर्चा कर रहा है। वहीं, साउथ अफ्रीका, थाईलैंड के अलावा लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील और चिली ने भी भारत के सामने अपनी गहरी रुचि जाहिर की है।

आखिर ब्रह्मोस ही पहली पसंद क्यों?

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे घातक और तेज क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। यह भारत के DRDO और रूस की एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया का एक संयुक्त उद्यम है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है।

इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी तकनीक है। यह दागो और भूल जाओ (Fire-and-Forget) के सिद्धांत पर काम करती है।

हर मोर्चे पर घातक प्रहार

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी खासियत इसकी वर्सटैलिटी है। इसे जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान—यानी चारों प्लेटफॉर्म्स से दागा जा सकता है। करीब मैक 2.8 की सुपरसोनिक स्पीड से हमला करने वाली यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है।

यह बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा बलों द्वारा किए गए सटीक और विध्वंसक हमलों ने दुनिया को भारत की इस सैन्य तकनीक की ताकत से रूबरू करा दिया है।

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