हुगली में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पोती दीपाणिता मुखर्जी के एक हालिया बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने बंगाल के सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को लेकर दशकों के दर्द को साझा करते हुए राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार की जमकर सराहना की है।
इतिहास से नाम मिटाने का आरोप मीडिया से बातचीत में दीपाणिता मुखर्जी ने कहा कि पिछले 70 से 80 वर्षों से बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों और उनके योगदान को सुनियोजित तरीके से मिटाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उनके दादा के योगदान, विशेषकर हिंदुत्व और बंगाल के प्रति उनकी निष्ठा को जनमानस से दूर रखने का एक संगठित प्रयास हुआ।
बीजेपी सरकार के आने से जगी उम्मीद दीपाणिता ने वर्तमान भाजपा सरकार के प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब इतिहास के उन पन्नों को पुनर्जीवित किया जा रहा है जिन्हें लंबे समय तक हाशिए पर रखा गया था। उन्होंने कहा, हम इस दिन को लेकर बेहद गौरवान्वित हैं कि अब डॉ. मुखर्जी की विरासत को फिर से सही स्थान मिल रहा है।
महिला सुरक्षा पर बड़ा दांव केवल इतिहास ही नहीं, दीपाणिता ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद बंगाल में वैचारिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा का माहौल बना है। उन्होंने विश्वास जताया कि अब राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के मामलों में सुधार होगा और बहन-बेटियां सुरक्षित महसूस करेंगी।
क्या है इस बयान के राजनीतिक मायने? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दीपाणिता का यह बयान केवल एक निजी भावना नहीं है, बल्कि यह बंगाल के उस बड़े वर्ग की आवाज है जो खुद को अपनी जड़ों से कटा हुआ महसूस कर रहा था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी एक देश, दो विधान के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था, और अब उनकी पोती के इस रुख से बंगाल में राष्ट्रवाद का मुद्दा और अधिक मुखर होने की संभावना है।
अब देखना यह है कि डॉ. मुखर्जी की विरासत को पुनर्जीवित करने का यह नैरेटिव बंगाल की आने वाली राजनीति और आगामी चुनावों में किस तरह से असर डालता है। सरकार के लिए महिला सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव की बहाली अब सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
#WATCH | Hooghly, West Bengal: Dipanita Mukherjee, grand daughter of Dr Shyama Prasad Mukherjee says, We want to express how happy and privileged we feel experiencing this day. For the past 70 to 80 years, there was a concerted effort—especially here in West Bengal to completely… pic.twitter.com/vl0N9SG319
— ANI (@ANI) July 7, 2026
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