मध्य प्रदेश के रीवा जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाओं के खोखले दावों के बीच, एक आदिवासी महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने दम तोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला? रीवा के मनगवां इलाके में एक आदिवासी महिला की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। गांव में न तो एम्बुलेंस पहुंच सकी और न ही पक्की सड़क थी। मजबूरन ग्रामीण महिला को खाट (खटिया) पर लादकर कीचड़ भरे रास्तों से अस्पताल की ओर ले गए।
रास्ते में ही थम गईं सांसें अस्पताल पहुंचने की जद्दोजहद के बीच, महिला ने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वायरल हो रहे वीडियो में ग्रामीणों को बदहाल रास्तों पर खाट उठाते हुए देखा जा सकता है, जो राज्य की बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
राजनीतिक गलियारों में आक्रोश हैरानी की बात यह है कि रीवा मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह जिला है। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे सरकारी तंत्र की विफलता बता रहे हैं।
विपक्ष का हमला विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में अमृतकाल के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग सड़क और एम्बुलेंस के अभाव में जान गंवा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी इस दर्दनाक घटना पर अभी तक राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, घटना के बाद अधिकारियों द्वारा मामले की जांच और परिस्थितियों के सत्यापन की उम्मीद की जा रही है।
यह घटना दिखाती है कि कैसे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन दांव पर लगा है। क्या जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
सड़क नहीं, तो जीवन भी नहीं?
— Shailendra Patel (@shailendrapinc) July 6, 2026
स्वास्थ्य मंत्री के गृह ज़िले रीवा में एक आदिवासी महिला की मौत सिर्फ़ आकाशीय बिजली गिरने से नहीं हुई, बल्कि बदहाल सड़क व्यवस्था और सरकारी लापरवाही ने भी उनकी जान ले ली।
ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) की रामकली रावत को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क नहीं… pic.twitter.com/DdxXhC1tGA
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