क्या खामेनेई की विदाई बदले की शुरुआत है? तेहरान की सड़कों पर गूंजता प्रतिशोध का शोर
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ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गहरे शोक से गुजर रहा है। पूर्व सर्वोच्च धार्मिक नेता अली खामेनेई की अंतिम विदाई में तेहरान का इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला लोगों के सैलाब से पट गया है। 63 हेक्टेयर में फैला यह परिसर, जो लाखों की क्षमता रखता है, पूरी तरह भर चुका है और बाहर भी लाखों लोग सड़कों पर हैं। शनिवार तक यहां एक करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान है।

पांच ताबूत और बदले की आग

इस जनाजे में सबसे ज्यादा चर्चा पांच ताबूतों की है। इनमें अली खामेनेई का पार्थिव शरीर है, तो साथ ही उनकी नातिन जहरा मोहम्मदी, बेटी बुशरा, दामाद और बहू के ताबूत भी रखे गए हैं। ये सभी अमेरिकी हमलों का शिकार हुए थे। 14 महीने की मासूम जहरा के ताबूत ने दुनिया भर को झकझोर दिया है। इन ताबूतों के इर्द-गिर्द लहराते लाल झंडे केवल मातम का नहीं, बल्कि ईरान के भीतर सुलग रही उस भीषण बदले की आग का प्रतीक हैं, जो अमेरिका और इजरायल के खिलाफ है।

मोजतबा खामेनेई को मिला जनता का समर्थन

तमाम अटकलों के बीच, अंतिम संस्कार में नए उत्तराधिकारी के रूप में मोजतबा खामेनेई के प्रति जनता का खुला समर्थन दिखा। भीड़ लब्बैक, सैयद मोजतबा के नारे लगा रही है, जो स्पष्ट संकेत है कि ईरानी जनता ने उन्हें अपने नए नेता के रूप में स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की नम आंखों के बीच, ईरान ने यह संदेश दे दिया है कि वह अपने नायक की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देगा।

ट्रंप के बयान ने जख्मों पर छिड़का नमक

एक ओर ईरान जहां आंसुओं में डूबा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका अपने स्वतंत्रता दिवस की 250वीं वर्षगांठ का भव्य जश्न मना रहा है। न्यूयॉर्क में पहली बार बॉल ड्रॉप समारोह आयोजित हुआ और 80 हजार से ज्यादा पटाखों के साथ अमेरिका ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

इस माहौल के बीच, डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। ट्रंप ने ईरान के मातम का मजाक उड़ाते हुए कहा कि उन्होंने ईरान को खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ एक हफ्ते की मोहलत दी है। ट्रंप का यह अहंकार भरा बयान ईरान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिसने वहां की जनता में गुस्से की एक नई लहर पैदा कर दी है।

क्या शांति की उम्मीद खत्म हो गई?

भले ही सऊदी अरब और कतर जैसे देशों ने भी इस जनाजे में अपने प्रतिनिधि भेजकर कूटनीतिक शिष्टाचार निभाया है, लेकिन ट्रंप की धमकियों ने साफ कर दिया है कि ईरान के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अंतिम संस्कार के बाद यदि शर्तें नहीं मानी गईं, तो ईरान को दोबारा बमबारी का सामना करना पड़ेगा।

तेहरान की सड़कों पर लहराते लाल झंडे और अमेरिका मुर्दाबाद के नारों के बीच दुनिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सबसे लंबा मातम शायद सबसे बड़े संघर्ष की प्रस्तावना बन सकता है।

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