होर्मुज को अखाड़ा न बनाएं, वरना भुगतने होंगे गंभीर परिणाम: ब्रिटेन और फ्रांस पर भड़का ईरान
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तेहरान: अमेरिका के साथ शांति वार्ताओं के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने ब्रिटेन और फ्रांस को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वे इस जलमार्ग को अपनी सैन्य शक्ति दिखाने का मंच न समझें।

ईरान का कड़ा रुख

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखी पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान इस जलमार्ग की सुरक्षा का गारंटर है और वह क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है।

गरीबाबादी ने चेतावनी दी कि होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल तटीय देशों की है। उन्होंने कहा, जो ताकतें इस इलाके में शांति बिगाड़ने की कोशिश करेंगी, उन्हें अपने दुस्साहस के नतीजों के लिए खुद जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

क्या है ब्रिटेन और फ्रांस का प्लान?

यह तनाव तब शुरू हुआ जब ब्रिटेन और फ्रांस ने ओमान के साथ मिलकर एक साझा बयान जारी किया। इसमें दोनों देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक मल्टीनेशनल मिलिट्री मिशन तैनात करने की योजना का संकेत दिया है।

ब्रिटेन और फ्रांस का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह समुद्री रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए वहां अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की आजादी बनाए रखना अनिवार्य है।

क्यों मची है खलबली?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। ईरान का दावा है कि बाहरी देशों की सैन्य मौजूदगी क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करेगी। वहीं, पश्चिमी देश इसे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम बता रहे हैं।

ईरान की इस सीधी धमकी ने खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य हलचल बढ़ा दी है। अब देखना यह है कि क्या पश्चिमी ताकतें अपने मिलिट्री मिशन के फैसले पर अडिग रहती हैं या तनाव को कम करने के लिए कोई नया रास्ता निकाला जाता है।

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