ममता बनर्जी को बड़ा झटका: भरोसेमंद नेता ने ही छोड़े तृणमूल के साथ, बागी गुट में शामिल हुईं चंद्रिमा भट्टाचार्य
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विधानसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी में जारी टूट-फूट के बीच, अब एक और बड़ा नाम उनसे अलग हो गया है। हाल ही में ममता द्वारा बंगाल प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपे जाने के बावजूद, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

बागियों के साथ हाथ मिलाया

इस्तीफा देने के तुरंत बाद, चंद्रिमा भट्टाचार्य की सक्रियता ने ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है। खबरों के अनुसार, इस्तीफा देने के तुरंत बाद चंद्रिमा ने विधानसभा में ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से मुलाकात की। उल्लेखनीय है कि ऋताब्रत बनर्जी को बागी विधायकों ने अपना नेता चुना है, जबकि ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए नामित किया था।

जहां भरोसा नहीं, वहां काम नामुमकिन

4 जुलाई को अपना इस्तीफा सौंपते हुए चंद्रिमा ने साफ कहा कि जहां विश्वास और भरोसा न हो, वहां काम करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी के सभी पदों के साथ-साथ बैंकों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) और निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर भी अपना नाम वापस ले लिया है। हालांकि, उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति अपना सम्मान बरकरार रखने की बात कही है।

ममता बनर्जी का कड़ा रुख

पार्टी में मची इस खलबली के बीच ममता बनर्जी ने एक वीडियो मैसेज जारी कर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वे खुद पार्टी की कमान संभालेंगी और संगठन को मजबूत करने पर पूरा ध्यान देंगी।

ममता ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, जिन लोगों ने मेरे साइन किए हुए चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता, वे आज पार्टी के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रहे हैं। अगर पार्टी का अस्तित्व नहीं था, तो उन्होंने चुनाव कैसे लड़ा?

गद्दार नेताओं को खुली चुनौती

ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वालों को गद्दार करार दिया और उन्हें चुनौती दी कि वे छुपकर राजनीति करने के बजाय हिम्मत दिखाते हुए भाजपा में शामिल हो जाएं। उन्होंने कहा, धोखाधड़ी की एक सीमा होती है। आपने उस पार्टी को धोखा दिया जिसने आपको राजनीतिक जीवन दिया।

फिलहाल, टीएमसी दफ्तर पर बागी गुट के दावे और वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों के बीच ममता सरकार के सामने अपनी सियासी जमीन बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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