TMC में बड़ा फेरबदल: ममता के फैसले से खफा चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का सियासी पारा अचानक बढ़ गया है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा लिए गए एक संगठनात्मक फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन को नई जिम्मेदारियां सौंपे जाने के ठीक बाद वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

चुनाव आयोग के साथ संवाद पर नया फरमान

ममता बनर्जी ने 15 जून को चुनाव आयोग (ECI) के सचिव को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि चुनाव आयोग के साथ पार्टी का आधिकारिक संवाद अब केवल दो नेता—अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन—ही करेंगे। यह कदम पार्टी की चुनावी रणनीति और आयोग के साथ समन्वय को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य का चौकाने वाला कदम

इस बदलाव के तुरंत बाद, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने न केवल पार्टी के बैंक खातों से जुड़े अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के पद को छोड़ा है, बल्कि चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी से भी खुद को अलग कर लिया है।

इस्तीफे के पीछे का पारिवारिक कनेक्शन

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस इस्तीफे की जड़ें पार्टी में बढ़ते अंतर्कलह से जुड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, चंद्रिमा के बेटे सौरव बसु का हाल ही में बागी गुट में शामिल होना इस तनाव का प्रमुख कारण है। बेटे के बागी कदम का असर सीधे मां की राजनीतिक साख पर पड़ता दिख रहा था।

निष्ठा पर सवाल बर्दाश्त नहीं

मीडिया से बातचीत में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी व्यक्ति विशेष से शिकायत नहीं है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिए कि जिस तरह से पार्टी के भीतर उनकी कार्यक्षमता और निष्ठा पर सवाल उठाए गए, उसके बाद गरिमा बनाए रखने के लिए इस्तीफा देना ही एकमात्र विकल्प बचा था।

क्या आगे बढ़ेगा संकट?

फिलहाल TMC की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ममता बनर्जी की टीम बिल्डिंग का हिस्सा है, लेकिन चंद्रिमा जैसे वरिष्ठ नेता का जाना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या पार्टी इस आंतरिक संकट को संभाल पाएगी या अन्य असंतुष्ट नेता भी मोर्चा खोलेंगे।

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