चीन से आए हो क्या? ट्रेन में पूर्वोत्तर भारत की बहनों के साथ नस्लीय टिप्पणी और बदसलूकी
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गुवाहाटी से अगरतला जा रही एक ट्रेन यात्रा दो बहनों के लिए एक बेहद दर्दनाक अनुभव बन गई। अपनी आरक्षित सीट को लेकर शुरू हुआ एक मामूली विवाद, देखते ही देखते नस्लीय उत्पीड़न और अपमानजनक टिप्पणियों में बदल गया।

सीट को लेकर हुआ विवाद घटना सुबह करीब 8 बजे की है। जब दोनों बहनें अपनी आरक्षित लोअर बर्थ पर पहुंचीं, तो उन्होंने पाया कि सह-यात्री परिवार ने दिन के समय में भी मिडल बर्थ को नीचे गिरा रखा था। रेलवे के नियमों के अनुसार, सुबह 6 बजे के बाद मिडल बर्थ को ऊपर कर देना चाहिए ताकि लोअर बर्थ पर बैठे यात्री आराम से बैठ सकें।

बहनों ने विनम्रतापूर्वक परिवार से बर्थ ऊपर करने का आग्रह किया। आरोप है कि परिवार ने न केवल इसे मानने से इनकार कर दिया, बल्कि बेहद असभ्य और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

रेलवे स्टाफ का दखल जब बात ज्यादा बिगड़ गई, तो बहनों ने रेलवे कर्मचारियों की मदद ली। अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और परिवार को नियम के अनुसार मिडल बर्थ ऊपर करने का निर्देश दिया। इसके बाद ही उन्हें उनकी सीट मिल पाई। हालांकि, विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।

नस्लीय टिप्पणियों से छलका दर्द बहनों का आरोप है कि परिवार का व्यवहार बदतमीजी की हदें पार कर गया था। जब एक बहन अपने भाई की सीट पर कुछ देर के लिए बैठी, तो परिवार ने उन्हें वहां से चले जाने को कहा। इसके बाद, उनकी शक्ल-सूरत को लेकर उन पर भद्दी नस्लीय टिप्पणियां की गईं।

बहनों के मुताबिक, परिवार ने उनसे पूछा, क्या आप चीन से आई हो? और अन्य अपमानजनक बातें कहीं। यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग इसे पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति बढ़ते नस्लीय भेदभाव से जोड़कर देख रहे हैं।

शिक्षित लोग जैसा व्यवहार करें मौके पर मौजूद एक रेलवे कर्मचारी ने स्थिति को संभालते हुए यात्रियों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने टोकते हुए कहा, हम सभी यहां शिक्षित लोग हैं, कृपया 5वीं कक्षा के छात्रों जैसी हरकतें न करें।

इस शर्मनाक घटना के बाद, पीड़ित बहनों ने रेलवे प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में सफर करने वाले किसी भी यात्री को उसकी जातीयता या शारीरिक बनावट के कारण प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

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