Z-सिक्योरिटी की वापसी पर लालू का तीखा प्रहार, बोले- बैकफुट पर है सरकार
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बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मचा सियासी घमासान एक बार फिर चरम पर है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दोबारा Z कैटेगरी की सुरक्षा बहाल कर दी गई है। इस फैसले के बाद लालू यादव ने सरकार के रुख पर तंज कसते हुए इसे सरकार की मजबूरी करार दिया है।

सरकार बैकफुट पर है

जब लालू यादव से पूछा गया कि क्या बिहार सरकार ने उनकी सुरक्षा हटाकर उनके साथ गलत किया था, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा, हां, बहुत गलत किया है। सरकार द्वारा सुरक्षा बहाल किए जाने के कदम को उन्होंने बैकफुट पर आना बताया है। उन्हें अब बुलेटप्रूफ कारें और सुरक्षा का पुराना सुरक्षा घेरा वापस मिल गया है।

सुरक्षा कम करने पर हुआ था भारी बवाल

करीब एक महीने पहले सरकार ने सुरक्षा की समीक्षा के नाम पर लालू और राबड़ी देवी की Z+ सुरक्षा को काफी कम कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ आरजेडी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की साजिश बताया था। विरोध स्वरूप लालू और तेजस्वी यादव ने अपने सुरक्षाकर्मियों को वापस कर दिया था।

दो दशकों के आशियाने से विदाई

यह सुरक्षा बहाली ऐसे समय में हुई है जब लालू परिवार अपना दशकों पुराना सरकारी ठिकाना छोड़ रहा है। गुरुवार को राबड़ी देवी ने पटना के 10, सर्कुलर रोड स्थित उस सरकारी बंगले को खाली कर दिया, जो दो दशक से अधिक समय तक उनका आवास और आरजेडी का कैंप ऑफिस रहा था। अब वे कौटिल्य नगर स्थित अपने निजी घर में शिफ्ट हो गए हैं।

उपमुख्यमंत्री का पलटवार

वहीं, सुरक्षा को लेकर छिड़े विवाद पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद को केवल अपने परिवार और आवास की चिंता है। चौधरी ने दावा किया कि उनके परिवार के लिए करीब 150 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सारे सुरक्षा संसाधन एक ही परिवार पर लगा दिए जाएंगे, तो आम जनता और अति-पिछड़े वर्गों की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?

समीक्षा का दावा, सियासत का वार

सरकार का आधिकारिक तर्क है कि सुरक्षा में बदलाव खतरे के आकलन के आधार पर की गई एक नियमित प्रक्रिया थी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा वापस लेना और दोबारा बहाल करना, दोनों ही कदम बिहार की राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं। अब देखना यह होगा कि इस सुरक्षा विवाद का आगामी राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।

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