ममता बनर्जी को बड़ा झटका: राइट हैंड चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़े TMC के सभी पद
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक गहरे अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद और राइट हैंड मानी जाने वालीं चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। चुनाव में मिली करारी हार के बाद यह इस्तीफा ममता के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है।

आर्थिक और प्रशासनिक शक्तियों से बनाई दूरी चंद्रिमा भट्टाचार्य ने केवल पद से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि उन्होंने पार्टी के वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण से भी खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) नहीं रहेंगी। इसके अलावा, उन्होंने भारत के चुनाव आयोग (ECI) के सामने ममता बनर्जी की अधिकृत व्यक्ति के रूप में अपनी भूमिका छोड़ दी है।

कौन हैं चंद्रिमा भट्टाचार्य? पेशे से वकील रहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य ममता बनर्जी की सरकार में एक ताकतवर चेहरा रही हैं। उन्होंने वित्त, स्वास्थ्य, भूमि सुधार और पुनर्वास जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। कानूनी सूझबूझ और प्रशासनिक अनुभव के कारण वे ममता के सबसे चुनिंदा नेताओं में गिनी जाती थीं। 3 जून 2026 को ही उन्हें बंगाल टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन महज एक महीने के भीतर उन्होंने यह पद छोड़ दिया है।

बगावत से घिरी टीएमसी बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष चरम पर है। पार्टी के 80 में से 50 से अधिक विधायक अब बागी गुट के नेता रितब्रत बनर्जी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर उठते सवालों के बीच, पार्टी मुख्यालय पर भी कब्जे की खबरें सामने आ रही हैं।

क्या ममता के हाथ से फिसल रही है सत्ता? चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी के भीतर ममता बनर्जी का नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है। जहां एक ओर बागी गुट ने पार्टी दफ्तर के ताले बदल दिए हैं, वहीं दूसरी ओर दिग्गज नेताओं का साथ छोड़ना यह बताता है कि टीएमसी के भीतर अब बगावत को संभालना ममता के लिए नामुमकिन सा होता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल ममता बनर्जी की कोर टीम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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