बर्मिंघम: ब्रिटेन के बर्मिंघम में हुई एक मारपीट की घटना ने देश में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रॉड स्ट्रीट पर हुई इस झड़प का वीडियो सामने आने के बाद दोहरे मापदंडों वाली पुलिसिंग की चर्चा तेज हो गई है।
क्या है मामला? 21 जून को ब्रॉड स्ट्रीट पर एक गोरे व्यक्ति और अश्वेत लोगों के एक समूह के बीच बहस हुई। देखते ही देखते यह बहस हिंसक हो गई और समूह ने उस व्यक्ति पर लात-घूंसों से हमला कर दिया। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के बजाय पीड़ित व्यक्ति को ही गिरफ्तार कर लिया, जबकि हमलावर मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
राजनीतिक गलियारों में आक्रोश इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। रिफॉर्म यूके के नेता निगेल फराज ने इसे दोहरे स्तर की पुलिसिंग करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रिटेन में गोरे लोगों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, नेवार्क के एमपी रॉबर्ट जेनरिक ने बर्मिंघम पुलिस के रेस एक्शन प्लान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस अधिकारियों को अश्वेत लोगों के प्रति नरमी बरतने या ओवर-पुलिसिंग न करने का निर्देश दिया जाएगा, तो ऐसी घटनाएं स्वाभाविक हैं।
पुलिस का बचाव और सफाई बर्मिंघम पुलिस ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकारियों ने स्थिति को देखते हुए हस्तक्षेप किया था। पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान एक अधिकारी को घूंसा मारा गया था, जिसके चलते 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने अपने अधिकारियों के काम का बचाव करते हुए कहा कि हालात के अनुसार उनकी कार्रवाई उचित थी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कानूनी प्रक्रिया में बाधा न आए, इसलिए इस फुटेज को सोशल मीडिया पर और अधिक न फैलाएं।
सवालों के घेरे में न्याय व्यवस्था पुलिस का दावा है कि उन्होंने एक अधिकारी पर हमले के चलते गिरफ्तारी की, लेकिन जनता और नेताओं का तर्क है कि जिस व्यक्ति पर पहले हमला हुआ, उसे ही अपराधी बना देना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। फिलहाल, यह मामला ब्रिटेन में नस्लीय आधार पर पुलिसिंग की तटस्थता को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।
Birmingham Police’s ‘Race Action Plan’ tells officers not to ‘over-police’ black people.
— Robert Jenrick (@RobertJenrick) July 3, 2026
It says disparities in outcomes are problems ‘regardless of their causes’.
If you tell your officers that, don’t be surprised when this happens👇 https://t.co/9qc3p6IO4c pic.twitter.com/PY9gcPRBON
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