पुणे में इन दिनों मानसून पूरी रफ्तार से बरस रहा है। शहर के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की खबरें आम हैं, लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने लोगों को हैरत में डाल दिया है। वीडियो में नगर निगम का एक कर्मचारी तेज बारिश के दौरान सड़क के डिवाइडर पर लगे पौधों की सिंचाई करते नजर आ रहा है।
क्या है वायरल वीडियो में? वीडियो में देखा जा सकता है कि पुणे की सड़कों पर भारी बारिश हो रही है। इसी के बीच एक पानी का टैंकर खड़ा है और कर्मचारी पाइप के जरिए पौधों में पानी डाल रहा है। जबकि पौधे पहले से ही बारिश के पानी से पूरी तरह भीगे हुए हैं। इस अजीबोगरीब दृश्य को देखकर राहगीर और सोशल मीडिया यूजर्स हैरान रह गए।
यूजर्स का फूटा गुस्सा वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यूजर्स इसे सरकारी संसाधनों और पानी की खुली बर्बादी करार दे रहे हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, यह सरकारी कामकाज का वह उदाहरण है, जहां बिना हालात देखे सिर्फ तय प्रक्रिया पूरी की जाती है। लोगों का तर्क है कि जब प्रकृति खुद सिंचाई कर रही है, तो सरकारी पानी और ईंधन क्यों फूंका जा रहा है?
सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल इस मामले में दोष सिर्फ कर्मचारी पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी मढ़ दिया गया है। कई लोगों का मानना है कि कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि उन्हें काम पूरा करना ही है, भले ही मौसम कैसा भी हो। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी अधिकारियों के पास मौसम का पूर्वानुमान देखने या काम को स्थगित करने का कोई विकल्प नहीं है?
कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की पोल अनेक नेटिजन्स ने इस पूरी कवायद को ठेकेदारी प्रथा से जोड़कर देखा है। कई लोगों का कहना है कि सड़क किनारे पौधों की सिंचाई का ठेका तय दिनों के हिसाब से दिया जाता है। ठेकेदार केवल अपना रिकॉर्ड पूरा करने और भुगतान पाने के लिए बारिश में भी पानी डाल रहे हैं। लोगों का सुझाव है कि इस तरह के काम की निगरानी होनी चाहिए ताकि वाकई जरूरत पड़ने पर ही सरकारी खजाने का उपयोग हो।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल यह घटना तब सामने आई जब मौसम विभाग पुणे और आसपास के घाट इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर चुका था। प्रशासन और नागरिक सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही जलभराव और भूस्खलन जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं। ऐसे में, संसाधनों का यह लापरवाह उपयोग प्रशासन की लचर निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या यह सिर्फ एक रूटीन काम था या संसाधनों की बर्बादी का जीता-जागता सबूत? यह वीडियो एक बार फिर दिखा गया है कि सरकारी सिस्टम को नियमों से ऊपर उठकर विवेक का इस्तेमाल करने की कितनी जरूरत है।
*पुणे में बारिश हो रही है और पौधों को पानी डाला जा रहा है. एक तरफ जहां मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में पानी की किल्लत है वहीं दूसरी ओर इस तरह का काम समझ कम ही आ रहा है....हालांकि वीडियो की सच्चाई कुछ और बताई जा रही है. pic.twitter.com/uqWgOzBRqR
— आजाद भारत का आजाद नागरिक (@AnathNagrik) July 4, 2026
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