पानी और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते : सिंधु जल संधि पर भारत के साथ खड़ा हुआ अफगानिस्तान
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सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत के कड़े रुख ने पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ा दी है। सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत की स्पष्ट नीति के बाद पाकिस्तान के हुक्मरानों और सेना प्रमुख असीम मुनीर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस बीच, भारत के इस स्टैंड का पड़ोसी देश अफगानिस्तान ने खुलकर समर्थन किया है।

अफगानिस्तान का भारत को समर्थन पाकिस्तान के साथ जारी तल्ख रिश्तों के बीच, अफगानी नागरिक सोशल मीडिया पर भारत की जमकर सराहना कर रहे हैं। अफगानिस्तान के लोगों का कहना है कि भारत को पाकिस्तान की धमकियों या रोने-धोने की परवाह किए बिना सिंधु का पानी रोके रखना चाहिए। उनका मानना है कि आतंकवाद और पानी एक साथ नहीं चल सकते।

93,000 की शर्मनाक हार की याद दिलाई सोशल मीडिया पर फजल अफगान नाम के एक यूजर ने भारत के फैसले का समर्थन करते हुए पाकिस्तान पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए लिखा, सब कुछ अस्थायी है, लेकिन 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों के सरेंडर और उनकी पैंट उतरवाने की घटना स्थायी है।

यह टिप्पणी 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना के उस ऐतिहासिक आत्मसमर्पण पर आधारित है, जहां जनरल एएके नियाजी के नेतृत्व में 93,000 सैनिकों ने हथियार डाले थे।

PoK में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विद्रोह वायरल हो रहे एक वीडियो में पीओके (PoK) की जनता को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ खुलेआम विरोध करते देखा जा सकता है। वीडियो में प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी फौज को लेकर अपमानजनक लहजे का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह वीडियो दर्शाता है कि पाकिस्तान न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में भी भारी जन-आक्रोश का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान की बढ़ती हताशा सिंधु जल संधि के मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में विफल रहने के बाद पाकिस्तान अब पूरी तरह हताश नजर आ रहा है। इस्लामाबाद में बुलाई गई अंतरराष्ट्रीय बैठकों में पाकिस्तान यह तर्क दे रहा है कि यदि संधि बहाल नहीं हुई, तो वैश्विक व्यवस्था ढह जाएगी। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा।

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