चीन को घेरने की रणनीति: जापान की पीएम का दिल्ली दौरा, क्या भारत बनेगा टोक्यो का सुरक्षा साथी ?
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टोक्यो और नई दिल्ली के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी नए मोड़ पर है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। ताइवान मुद्दे पर चीन को खुली चुनौती देने वाली जापान की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए एक मजबूत गठबंधन तैयार करना है।

चीन के खिलाफ जापान का आक्रामक रुख ट्रंप प्रशासन के बाद जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो चीन के खिलाफ खुलकर खड़ा है। प्रधानमंत्री तकाइची ने स्पष्ट किया है कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान ताइवान के साथ खड़ा होगा। इस बयान के बाद चीन ने जापान को युद्ध की चेतावनी भी दी है।

भारत-जापान के बीच बड़े समझौते दिल्ली दौरे के दौरान डिफेंस, ट्रेड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायो-गैस जैसे अहम क्षेत्रों में कई समझौते हुए हैं। जानकारों का मानना है कि इन समझौतों के पीछे का असल मकसद उन देशों को एकजुट करना है जो चीन की विस्तारवादी नीति से चिंतित हैं। साथ ही, घरेलू स्तर पर गिरती लोकप्रियता से जूझ रहीं तकाइची के लिए यह यात्रा एक आसान राजनीतिक जीत के रूप में भी देखी जा रही है।

नई दिल्ली पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है? वासेडा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बेन एस्कियोन के अनुसार, जापान भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा बनाना चाहता है। हालांकि, समस्या यह है कि भारत का सहयोग चीन के साथ उसके अपने संबंधों के आधार पर बदलता रहता है। जब सीमा पर तनाव होता है, तो भारत जापान के साथ मजबूती से खड़ा होता है, लेकिन रिश्ते सामान्य होने पर वह किसी भी गुटबाजी से दूरी बना लेता है। फिलहाल चीन के साथ भारत के रिश्ते स्थिर माने जा रहे हैं, जिस कारण भारत का जापान के हर प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करना मुश्किल लगता है।

सेमीकंडक्टर और डॉलर से मुक्ति की राह भारत और जापान के बीच चीन पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा समझौता हुआ है। पूर्वोत्तर भारत में एक विशाल सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने पर काम हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच अमेरिकी डॉलर को दरकिनार कर रुपये-येन में द्विपक्षीय व्यापार शुरू करने पर भी मंथन हुआ है, जो भविष्य में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देगा।

गठबंधन की चुनौती जापानी एक्सपर्ट तोशिमित्सु शिगेमुरा का मानना है कि तकाइची की विदेश नीति का मुख्य केंद्र चीन का मुकाबला करना है। उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ रक्षा संबंधों को सुधारा है और अब फिलीपींस व इंडोनेशिया जैसे देशों को सुरक्षा सहयोग देने की योजना बना रही हैं। भारत के साथ यह खास रणनीतिक साझेदारी उसी बड़ी कड़ी का हिस्सा है। अब देखना यह है कि क्या भारत चीन के खिलाफ जापान की इस आक्रामक इंडो-पैसिफिक रणनीति में पूरी तरह शामिल होगा या अपनी संतुलन वाली नीति को ही जारी रखेगा।

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