बेंच पर वैभव सूर्यवंशी, मैदान पर ज़िद : भारतीय टीम कब तोड़ेगी लेफ्ट-राइट का तिलिस्म?
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भारतीय क्रिकेट में आजकल एक पुरानी कहावत याद आ रही है— का बरषा सब कृषी सुखानें, समय चुकें पुनि का पछितानें। यानी जब फसल सूख जाए, तो बारिश का कोई अर्थ नहीं। आज टीम इंडिया का प्रबंधन ठीक इसी राह पर है। 15 साल के वंडर किड वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू टालना न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए भी असंतोष का विषय बना हुआ है।

गावस्कर की चेतावनी और मौकों का अभाव दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर भी इस अनिश्चितता से परेशान हैं। उनका मानना है कि वैभव के डेब्यू में जितनी देरी होगी, उन पर दबाव उतना ही बढ़ता जाएगा। आयरलैंड के खिलाफ हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर का यह तर्क कि वे जल्दबाजी नहीं करना चाहते, कमजोर साबित हो रहा है। आयरलैंड जैसी टीम के खिलाफ वैभव को न परखना एक भारी चूक रही, जिसका खामियाजा टीम को सीरीज गंवाकर भुगतना पड़ा।

क्यों वैभव हैं टीम इंडिया के तुरूप के इक्के ? वैभव का रिकॉर्ड महज 15 साल की उम्र तक सीमित नहीं है। श्रीलंका में ट्राई सीरीज के फाइनल में 29 गेंदों पर 94 रनों की उनकी आतिशी पारी और आईपीएल-19 में 230+ का स्ट्राइक रेट यह साबित करता है कि वे मॉडर्न टी20 क्रिकेट के लिए बने हैं। वे उस यूनिवर्सल बॉस बेबी की तरह हैं जो पहली ही गेंद से मैच का पासा पलटने का साहस रखते हैं। उन्हें बेंच पर बैठाना प्रतिभा का अपमान करने जैसा है।

क्या रिकॉर्ड से ज्यादा फॉर्म अहम नहीं? वैभव के पास सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने का स्वर्णिम अवसर है। लेकिन बात सिर्फ रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की है। लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें बाहर बिठाकर टीम मैनेजमेंट कहीं न कहीं उनके मनोबल के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यदि भविष्य का सचिन तैयार करना है, तो उन्हें मैच टाइम देना ही होगा।

लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन की बेमतलब उलझन भारतीय टीम मैनेजमेंट इस समय राइट-लेफ्ट बैटिंग कॉम्बिनेशन के जाल में फंसा हुआ है। टॉप ऑर्डर में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी और संजू सैमसन के दाएं हाथ होने को उनकी ढाल बनाया जा रहा है। संजू लगातार फ्लॉप हो रहे हैं, फिर भी केवल एक हाथ के बल्लेबाज होने के नाते उन्हें टीम में ढोया जा रहा है। यह तर्क खेल की शर्तों पर कतई सटीक नहीं बैठता।

गंभीर और श्रेयस अय्यर से सीधी अपील मैदान पर चयन का आधार खिलाड़ी की मौजूदा फॉर्म होनी चाहिए, न कि उसका पिछला कद। संजू सैमसन ने पिछली 10 पारियों में संघर्ष किया है, जबकि वैभव फॉर्म के शिखर पर हैं। कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर को अब अपनी ज़िद छोड़कर खेल की जरूरत को समझना होगा।

अगर वैभव को मौका नहीं दिया गया, तो समय निकलने के बाद पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। वैभव सूर्यवंशी का मैदान पर उतरना न केवल भारतीय क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत होगी, बल्कि टीम की जीत की गारंटी भी बन सकता है। समय है कि टीम मैनेजमेंट कागजी गणित से बाहर निकले और प्रतिभावान खिलाड़ियों पर भरोसा जताए।

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