महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा मंदिर के भीतर स्थित अमृत कुंड की सफाई के दौरान तली में सदियों पुराना एक शिवलिंग मिला है।
क्या है अमृत कुंड का रहस्य? मंदिर परिसर में स्थित अमृत कुंड , जिसे अमृतवर्षिणी भी कहा जाता है, पेशवा कालीन एक ऐतिहासिक जलाशय है। इसका पानी वर्षों से मंदिर की दैनिक पूजा और अभिषेक के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। ASI की टीम जब इस 65 फुट गहरे पत्थर के टैंक की सफाई कर रही थी, तभी गाद और मलबे के नीचे से यह प्राचीन शिवलिंग बाहर आया।
240 से 335 साल पुराना हो सकता है शिवलिंग इतिहासकारों के अनुसार, मौजूदा मंदिर का पुनर्निर्माण पेशवा बालाजी बाजी राव ने 1755 और 1786 के बीच करवाया था। इस आधार पर यह शिवलिंग कम से कम 240 साल पुराना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 1690 में औरंगजेब की सेना द्वारा तोड़े गए मूल मंदिर का हिस्सा है, तो इसकी उम्र 335 साल से भी अधिक हो सकती है। फिलहाल, वैज्ञानिक डेटिंग के बिना इसकी सटीक आयु का दावा करना कठिन है।
गाद के नीचे कैसे छिपा था यह शिवलिंग? यह शिवलिंग किसी चमत्कार की तरह नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सेडिमेंटेशन (sedimentation) प्रक्रिया के कारण छिपा था। हर साल बारिश के साथ जलाशय में मिट्टी और रेत की परतें जमती गईं, जिससे टैंक की तली में मौजूद चीजें धीरे-धीरे मलबे में दब गईं। ASI की डीसिल्टिंग (सफाई) प्रक्रिया ने इस नियंत्रित खुदाई का काम किया, जिससे ये प्राचीन नक्काशी और मूर्तियां फिर से प्रकाश में आ सकीं।
बेसाल्ट पत्थरों का अनूठा संगम त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र दक्कन ट्रैप का हिस्सा है, जो करोड़ों साल पहले हुए ज्वालामुखी विस्फोटों से बनी बेसाल्ट चट्टानों से ढका है। यहां के शिल्पकारों ने पिछले 2,000 वर्षों से काले बेसाल्ट पत्थर को तराश कर अद्भुत कलाकृतियां बनाई हैं। मौसम की मार झेलने की असाधारण क्षमता के कारण ही यह शिवलिंग सदियों तक पानी में डूबे रहने के बाद भी आज सुरक्षित और स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
अगला कदम क्या होगा? फिलहाल ASI इस खोज का अध्ययन कर रहा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस शिवलिंग को लेकर भारी उत्साह है। मंदिर प्रशासन और पुरातत्व विभाग अब यह तय करेंगे कि इस शिवलिंग को उसी स्थान पर संरक्षित रखा जाए या इसे मंदिर के किसी अन्य भाग में पुनर्स्थापित किया जाए।
During the ongoing conservation works by ASI at the Trimbakeshwar Temple, Nashik, a stone Shivalinga was discovered during the desilting of the temple’s historic water tank, locally known as Amrit Kund.
— Archaeological Survey of India (@ASIGoI) July 1, 2026
The Shivalinga was found at the bottom of the tank while removing… pic.twitter.com/34KcEk3AUb
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