विदेशी जेलों में बंद 23 हजार पाकिस्तानी: बदनामी का दाग और डिपोर्टेशन की तलवार
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विदेशों में पाकिस्तानियों की बढ़ती आपराधिक गतिविधियों ने पूरी दुनिया में मुल्क की साख पर बट्टा लगा दिया है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक, पाकिस्तानी नागरिकों के अपराधों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। अब स्थिति यह है कि इन देशों ने इन अपराधियों को डिपोर्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है।

जर्मनी में घिनौनी वारदात का खुलासा

हाल ही में जर्मनी के नूर्नबर्ग शहर में एक बड़े आपराधिक रैकेट का पर्दाफाश हुआ। जांच में खुलासा हुआ कि इसमें शामिल लोग जर्मन महिलाओं और लड़कियों को न केवल यौन शोषण का शिकार बना रहे थे, बल्कि उन्हें ड्रग्स के दलदल में धकेलने का काम भी कर रहे थे। इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में पाकिस्तानी मूल के नागरिक भी शामिल पाए गए हैं, जिसके बाद से संबंधित देशों में पाकिस्तानी प्रवासियों के प्रति सख्ती बढ़ गई है।

23 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सलाखों के पीछे

पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर की विभिन्न जेलों में 23,456 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक बंद हैं। इन पर हत्या, लूट, ड्रग्स तस्करी, बलात्कार और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बेबाक बयान

इस गंभीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि विदेशों में मौजूद पाकिस्तानियों में एक बड़ा वर्ग आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि अगर इनमें से 10 हजार लोग डिपोर्ट होकर वापस आते हैं, तो इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि पहले पाकिस्तानी विदेशों में मेहनत-मजदूरी करते थे, लेकिन अब उनका एक बड़ा हिस्सा गलत कामों में लिप्त हो गया है।

यूरोप बना अपराधियों का नया ठिकाना

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में सख्ती के बाद, अब इन अपराधियों ने अपना रुख यूरोप की तरफ कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप में होने वाली आपराधिक वारदातों में पाकिस्तानी मूल के नागरिकों की संलिप्तता चिंताजनक स्तर तक बढ़ गई है। ब्रिटेन से लेकर जर्मनी तक, स्थानीय नागरिक इन प्रवासियों की हरकतों से परेशान हैं, जिसके चलते अब सरकारों ने इन अवांछित तत्वों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इससे न केवल पाकिस्तान की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि वहां के मेहनतकश प्रवासियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

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