प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा और उन्हें मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष इस सम्मान का स्वागत करने के बजाय इसे लेकर सवाल खड़े कर रहा है और सेशेल्स को दी गई आर्थिक मदद पर भी निशाना साध रहा है।
अवॉर्ड पर विवाद: सच्चाई क्या है? सेशेल्स की घरेलू राजनीति के चलते वहां की सरकार ने अपनी पुरानी पुरस्कार प्रणाली को बदलकर नया सिस्टम लागू किया है। इसी नए बदलाव के तहत पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने हैं। वहीं, पुरस्कार प्रमाणपत्र में स्पेलिंग की गलती का मुद्दा उठाकर विपक्ष पीएम के सम्मान का मजाक उड़ा रहा है। सवाल यह है कि यदि किसी दूसरे देश की प्रशासनिक चूक होती है, तो उसे भारत के सम्मान से जोड़कर देखना कहाँ तक उचित है?
सेशेल्स का सामरिक महत्व महज 459 वर्ग किलोमीटर के छोटे से देश सेशेल्स को कमतर आंकना एक बड़ी रणनीतिक भूल हो सकती है। इसका समुद्री क्षेत्र (एक्सक्लूज़िव इकोनॉमिक ज़ोन) 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। हिंद महासागर का यह इलाका एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री रास्ते के करीब है, जहाँ से दुनिया का 40% कच्चा तेल गुजरता है। चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच हिंद महासागर में भारत की मजबूत उपस्थिति के लिए सेशेल्स से बेहतर संबंध अनिवार्य हैं।
आर्थिक मदद पर दोहरा मापदंड? विपक्ष पीएम मोदी द्वारा सेशेल्स को दिए गए 175 मिलियन डॉलर के आर्थिक पैकेज पर भी सवाल उठा रहा है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत दशकों से अन्य देशों को सहायता देता रहा है। साल 2000 से अब तक भारत 65 से अधिक देशों को 48 अरब डॉलर की मदद कर चुका है। 2012 में यूपीए सरकार के दौरान भी तत्कालीन राष्ट्रपति की यात्रा में सेशेल्स को 75 मिलियन डॉलर का पैकेज दिया गया था।
रणनीति और संस्कृति का संगम अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने न केवल रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊंचाई दी। उन्होंने सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में भगवान गणेश के मंदिर में पूजा-अर्चना की। यह मंदिर वहां की 5 फीसदी भारतीय मूल की आबादी के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
संक्षेप में, सेशेल्स के साथ बढ़ती मित्रता भारत की सागर (SAGAR) नीति का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले सम्मान को घरेलू राजनीति के चश्मे से देखना न केवल संकुचित सोच को दर्शाता है, बल्कि यह देश के कूटनीतिक हितों को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
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— Zee News (@ZeeNews) June 29, 2026
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