स्कूल खुला तो छत गायब: बीकानेर में बड़ा हादसा टला, बच्चों की जान से खिलवाड़ पर भड़के ग्रामीण
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बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के तोलियासर गांव में एक सरकारी स्कूल की जर्जर हालत ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार को जैसे ही स्कूल के ताले खोले गए, तो वहां का नजारा देखकर स्टाफ के होश उड़ गए।

क्या हुआ स्कूल में? सोमवार सुबह जब शिक्षक कक्षा 7 का कमरा खोलने पहुंचे, तो देखा कि छत की 10 पट्टियां पूरी तरह टूटकर नीचे गिर चुकी थीं। छत का भारी मलबा गिरने से कमरे में रखा पूरा फर्नीचर चकनाचूर हो गया। गनीमत यह रही कि यह घटना छुट्टियों के दौरान हुई, वरना बड़ा मानवीय हादसा हो सकता था।

प्रशासन की असुरक्षित चेतावनी को किया नजरअंदाज हैरानी की बात यह है कि पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने 22 जून 2026 को ही इस भवन का निरीक्षण कर इसे आधिकारिक तौर पर असुरक्षित और जर्जर घोषित कर दिया था। इसके बावजूद प्रशासन ने न तो बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की और न ही मरम्मत का कोई ठोस कदम उठाया। नतीजा यह हुआ कि आज स्थिति विस्फोटक हो गई है।

एक भी कमरा सुरक्षित नहीं सिर्फ एक कमरा ही नहीं, बल्कि पूरे स्कूल भवन की स्थिति भयावह है। अन्य कमरों की छतें भी अपनी जगह छोड़ चुकी हैं और दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। स्कूल परिसर का कोई भी हिस्सा अब विद्यार्थियों को बैठाने लायक नहीं बचा है।

पेड़ों के नीचे होगी अब पढ़ाई बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन ने फिलहाल कक्षाएं खुले आसमान के नीचे और पेड़ों की छाया में लगाने का निर्णय लिया है। लेकिन अभिभावक इस स्थिति से बेहद नाराज हैं।

अगर बच्चे अंदर होते तो क्या होता? स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब विभाग को भवन असुरक्षित होने की जानकारी थी, तो छुट्टियों के दौरान मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे हैं।

प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव स्कूल के प्रधानाचार्य ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है। ग्रामीण अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तुरंत नए भवन का निर्माण शुरू किया जाए और बच्चों के बैठने के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं।

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