क्या ट्रंप सच में पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिनके नाम पर भारत में सड़क है? जानिए विदेशी नामों वाली सड़कों का दिलचस्प इतिहास
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हाल ही में हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास एक सड़क का नाम डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू रखा गया। इस पर खुद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वह इस सम्मान को पाने वाले भारत में पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। लेकिन क्या यह दावा पूरी तरह सही है? आइए जानते हैं भारतीय सड़कों के विदेशी नामों के पीछे छिपी सच्चाई।

क्या ट्रंप वाकई पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं?

ऐतिहासिक दस्तावेजों पर नजर डालें तो ट्रंप का दावा पूरी तरह सटीक नहीं बैठता। पुणे में कैनेडी रोड नाम से एक सड़क पहले से मौजूद है, जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के नाम पर है। इसके अलावा, तमिलनाडु के मछलीपट्टनम में भी जेएफ कैनेडी रोड का उल्लेख मिलता है। हालाँकि, इन सड़कों के नामकरण को लेकर कोई औपचारिक सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं है, लेकिन ये नाम दशकों से अस्तित्व में हैं।

कूटनीति का दिल्ली कनेक्शन

भारत की राजधानी नई दिल्ली का चाणक्यपुरी इलाका विदेशी हस्तियों के नाम वाली सड़कों का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ नेल्सन मंडेला मार्ग, आंद्रे मालरो मार्ग, ओलोफ पाल्मे मार्ग और क्वामे नक्रूमा मार्ग जैसी सड़कें भारत की विदेश नीति और वैश्विक सोच को दर्शाती हैं। नेहरू युग में शुरू हुई इस परंपरा का उद्देश्य उन वैश्विक नेताओं को सम्मान देना था, जिन्होंने उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी या भारत के साथ मधुर संबंध साझा किए।

कोलकाता का दिलचस्प कूटनीतिक संयोग

भारत में विदेशी नेताओं के सम्मान का सबसे अनूठा उदाहरण कोलकाता में देखने को मिलता है। यहाँ अमेरिकी वाणिज्य दूतावास जिस सड़क पर स्थित है, उसका नाम हो ची मिन्ह सरणी है। यह वियतनाम के महान क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह के नाम पर है। यह शायद दुनिया का सबसे दिलचस्प कूटनीतिक संयोग है कि अमेरिका का दूतावास एक ऐसे नेता के नाम वाली सड़क पर स्थित है, जिनके साथ अमेरिका के ऐतिहासिक मतभेद रहे थे।

भारत-अमेरिका रिश्तों का नया प्रतीक

हैदराबाद का डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू पुरानी कूटनीतिक परंपरा से थोड़ा अलग है। यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच आज के आर्थिक, तकनीकी और स्ट्रैटेजिक रिश्तों की नई तस्वीर है। यह सड़क उन इलाकों में है जहाँ गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियां मौजूद हैं। यह वर्तमान सिम्बॉलिक डिप्लोमेसी का एक सशक्त उदाहरण है।

सड़कों से इतर: गांव और इमारतें

केवल सड़कें ही नहीं, भारत में अमेरिकी राष्ट्रपतियों के नाम से जुड़ी अन्य यादें भी हैं:

इन तमाम उदाहरणों से साफ है कि भारत की सड़कें और स्थान केवल आने-जाने का रास्ता नहीं हैं, बल्कि ये देश की विदेश नीति, ऐतिहासिक मित्रता और वैश्विक दृष्टिकोण के जीवंत दस्तावेज़ हैं।

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