केतन अग्रवाल मर्डर केस: अमाल मलिक का छलका दर्द, बोले- राक्षसों ने एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया
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पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की हत्या के मामले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस जघन्य अपराध पर अब मशहूर सिंगर और कंपोजर अमाल मलिक ने अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। अमाल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए सिस्टम और आजकल के रिश्तों में बढ़ती लालच पर सवाल उठाए हैं।

सिर्फ एक ना कहना ही काफी था अमाल मलिक ने घटना पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि अगर रिश्ता मंजूर नहीं था, तो इसे खत्म करने के लिए हत्या जैसा घिनौना कदम उठाने की क्या जरूरत थी? अमाल ने कहा, ना कहना बहुत आसान था। बस इतना कहना था कि मेरा दिल किसी और के पास है। अगर बात नहीं बनती, तो परिवार को शामिल किया जा सकता था। किसी की जान लेना पागलपन है।

कानून के गलत इस्तेमाल पर सवाल अमाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून काफी मजबूत हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सिस्टम में हेर-फेर करने के लिए कानूनों का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन लोगों को डरपोक और कमजोर बताया जो अपनी मर्जी थोपने के लिए साजिश का सहारा लेते हैं।

राक्षसों ने छीना मासूम पोस्ट में अमाल ने उन लोगों के प्रति गुस्सा जाहिर किया जिन्होंने केतन की जान ली। उन्होंने लिखा, इन दोनों की हिम्मत तो देखिए, इन्हें लगता है कि किसी का बच्चा छीनकर और एक जिंदगी खत्म करके वे खुशी-खुशी जी पाएंगे? ये राक्षस हैं। अमाल ने केतन अग्रवाल की पुरानी तस्वीरों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मुस्कान को देखकर साफ पता चलता है कि वह इस रिश्ते को लेकर कितने उत्साहित और सच्चे थे।

रिश्ते हैं या दिखावा? अमाल ने आज की पीढ़ी के रिश्तों पर भी तंज कसा। उन्होंने सवाल किया कि क्या शादी अब सिर्फ इंस्टाग्राम के लिए की जा रही है या दिखावे के लिए? उन्होंने कहा, हम सभी अच्छी जिंदगी चाहते हैं, लेकिन क्या सच्चा प्यार सिर्फ महंगे हनीमून या वैकेशन पर निर्भर है? केतन जैसा साफ दिल और प्यारा इंसान इस बर्बरता का हकदार नहीं था।

मर्दों की तरफ से मांगी माफी अपने नोट के अंत में अमाल ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि वह मानते हैं कि इतिहास में महिलाओं ने पुरुषों के कारण बहुत कुछ सहा है। उन्होंने कहा, मैं इसके लिए माफी मांगता हूं, लेकिन हर समस्या को टॉक्सिक बताकर अपनी जिम्मेदारी से भागना सही नहीं है। जुल्म के खिलाफ लड़ना जरूरी है, लेकिन इसे उन लोगों तक सीमित रखें जो वाकई आपको दबाने की कोशिश करते हैं। किसी बेगुनाह को शिकार बनाना न्याय नहीं है।

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