यहाँ आपके निर्देशानुसार संपादित लेख प्रस्तुत है:
भारत की विदेश नीति को लेकर एक बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। कॉन्ग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने एक लेख के जरिए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी मानवीय संकट पर सरकार की पत्थर जैसी चुप्पी को न केवल नैतिक रूप से गलत, बल्कि राष्ट्रीय हितों के विपरीत बताया है।
सोनिया गाँधी का तर्क है कि भारत अपनी ऐतिहासिक कूटनीतिक नीतियों से भटक गया है। उनके अनुसार, फिलिस्तीन और ईरान जैसे देशों से दूरी बनाने के कारण भारत वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ रहा है, और इसका फायदा पाकिस्तान उठा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा को एक हैरान करने वाला रणनीतिक निर्णय करार दिया है।
लेख में सोनिया गाँधी ने संयुक्त राष्ट्र के जाँच आयोग की सितंबर 2025 और जून 2026 की रिपोर्टों का हवाला दिया है। उन्होंने गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई में बच्चों की मौतों और स्वास्थ्य ढाँचे के विनाश पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि, उन्होंने हमास के अक्टूबर 2023 के हमले को अस्वीकार्य बताया, लेकिन गाजा में इजरायल की जवाबी कार्रवाई को बेलगाम क्रूरता करार दिया है।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भी इस लेख का पुरजोर समर्थन किया है। खड़गे ने इसे देश की विदेश नीति की खामियों को उजागर करने वाला बताया, तो वहीं राहुल गाँधी ने सरकार से नैतिक स्पष्टता के साथ फिलिस्तीन के मुद्दे पर आवाज उठाने का आह्वान किया है।
दूसरी ओर, विश्लेषकों का मानना है कि भारत-इजरायल की साझेदारी केवल वैचारिक नहीं, बल्कि ठोस राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर टिकी है। 1992 से शुरू होकर आज इजरायल भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है। विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर (2025) के दौरान, इजरायली तकनीक—जैसे हारोप ड्रोन, बराक-8 मिसाइल प्रणाली और स्पाइस-2000 बम—ने भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त दिलाई थी। पाकिस्तान के खिलाफ की गई इन सर्जिकल स्ट्राइक्स में इजरायली उपकरणों की भूमिका ने भारत की सैन्य क्षमता को अभेद्य बनाया है।
सत्तारूढ़ भाजपा ने सोनिया गाँधी के लेख को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे चयनात्मक संवेदनशीलता बताया। उन्होंने सवाल किया कि कॉन्ग्रेस गाजा के लिए तो मुखर है, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर चुप क्यों है? भाजपा का आरोप है कि कॉन्ग्रेस अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर वोट-बैंक को प्राथमिकता दे रही है।
भारत आधिकारिक रूप से टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन करता है, जो संतुलन पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में एकतरफा रुख अपनाना देश के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को खतरे में डाल सकता है। अब देखना यह है कि क्या यह विवाद केवल एक ओप-एड तक सीमित रहेगा या आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक दिशा पर कोई बड़ा असर डालेगा।
Congress Parliamentary Party Chairperson, Smt. Sonia Gandhi s evocative piece calling out Modi Govt s silence and inaction for our Palestinian brothers and sisters whose children have been brutally targeted is a stark reminder of how our current foreign policy has alienated our… pic.twitter.com/VSWCA0qJPv
— Mallikarjun Kharge (@kharge) June 27, 2026
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