अमेरिका का ईसाई बहुल राज्य टेक्सास, जो कभी अपनी काउबॉय संस्कृति और पारंपरिक अमेरिकी पहचान के लिए दुनिया भर में मशहूर था, आज एक बड़े सामाजिक और जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह बदलाव इतना गहरा है कि अब लोगों को अपने ही घरों में अपनी धार्मिक पहचान छिपाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस बदलाव का सबसे डरावना चेहरा हाल ही में एक भारतीय मूल के व्यक्ति, रवि वाविलाल के मामले से सामने आया। कैंसर से जूझ रहे रवि जब अपना घर बेचना चाहते थे, तो उन्हें भारी नुकसान के डर से अपने घर में स्थापित भगवान गणेश की मूर्ति और अन्य हिंदू प्रतीकों को हटाकर एक स्टोरेज रूम में रखना पड़ा।
उनका यह फैसला इसलिए था क्योंकि संभावित खरीदार केवल मूर्ति को देखकर ही घर खरीदने से पीछे हट रहे थे। यह घटना केवल एक घर की बिक्री की समस्या नहीं, बल्कि उस बढ़ते असहिष्णुता के माहौल को दर्शाती है, जहाँ बहुसंख्यक आबादी वाली जगहों पर अन्य धर्मों के प्रतीकों को बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है।
रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में टेक्सास की मुस्लिम आबादी में 172 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। साल 2020 तक यहाँ मुस्लिम आबादी 3 लाख के पार थी, जो अब अनुमानित 4 से 5 लाख के बीच बताई जा रही है।
डलास-फोर्ट वर्थ जैसे क्षेत्रों में नई मस्जिदों, इस्लामी स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों का जाल बिछ चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल प्रवासन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सांस्कृतिक परिवर्तन है, जो सड़कों के अरबी नामों और बड़े मजहबी प्रोजेक्ट्स जैसे EPIC सिटी में साफ दिखाई देता है।
टेक्सास के स्थानीय एक्टिविस्ट और विश्लेषक इस बदलाव की तुलना ब्रिटेन की स्थिति से कर रहे हैं। जिस तरह ब्रिटेन के रोदरहैम और रोचडेल जैसे शहरों में डेमोग्राफिक बदलाव के बाद ग्रूमिंग गैंग जैसे अपराध बढ़े, टेक्सास के लोग उसी तरह की आशंका व्यक्त कर रहे हैं।
डॉक्यूमेंट्रीज में यह दिखाया गया है कि कैसे टेक्सास में रहने वाले कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग शरिया कानून लागू करने की बातें कर रहे हैं। कई स्थानीय नेताओं का तर्क है कि ईरान का उदाहरण हमारे सामने है, जहाँ मजहबी कट्टरपंथ ने पूरे शासन और सामाजिक ढांचे को ही बदलकर रख दिया था।
टेक्सास में बढ़ते इस इस्लामीकरण के विरोध में वैलेंटीना गोमेज जैसे नेताओं ने मोर्चा खोला था। उन्होंने EPIC सिटी जैसी परियोजनाओं और इस डेमोग्राफिक बदलाव का खुलकर विरोध किया। यहाँ तक कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान कुरान जलाने जैसे सख्त कदम भी उठाए।
हालांकि, इस कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने के बावजूद, वैलेंटीना गोमेज को 2024 और 2026 के चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उनकी हार यह दर्शाती है कि टेक्सास का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य अब किस हद तक विभाजित हो चुका है।
आज टेक्सास में मस्जिदों की गूँज और बढ़ती मुस्लिम आबादी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। जो बहस टेक्सास से शुरू हुई है, वह अब पूरे अमेरिका के लिए एक चेतावनी की तरह है। क्या टेक्सास अपनी पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रख पाएगा, या फिर यह बदलाव राज्य की नींव को ही बदल देगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय के सामाजिक ताने-बाने पर निर्भर करेंगे।
An Indian man in Texas was forced to remove a Ganesha idol from his home after a realtor told him that Hindu religious imagery made his home harder to sell amid rising anti-Indian sentiment pic.twitter.com/zNNtnSvox3
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) June 22, 2026
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