कचरे के पहाड़ों से दिल्ली को मिलेगी मुक्ति, 1 साल में तैयार होंगी 100 जीरो-वेस्ट कॉलोनियां
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राजधानी दिल्ली के लैंडफिल साइट्स पर बढ़ते कचरे के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। उपराज्यपाल ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को शहर में जीरो-वेस्ट कॉलोनी मॉडल को तेजी से लागू करने का कड़ा निर्देश दिया है। लक्ष्य स्पष्ट है: कचरे का निपटान लैंडफिल भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही करना।

क्या होती है जीरो-वेस्ट कॉलोनी ? जीरो-वेस्ट कॉलोनी वह आवासीय इलाका है, जहां कचरे को फेंकने से पहले ही स्रोत (घर) पर अलग-अलग किया जाता है। गीला कचरा, सूखा कचरा, ई-वेस्ट और सैनिटरी वेस्ट को अलग-अलग श्रेणी में बांटा जाता है। गीले कचरे से वहीं खाद बनाई जाती है, जबकि सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। इससे लैंडफिल साइट्स पर कचरे का बोझ न के बराबर रह जाता है।

नवजीवन विहार बना मिसाल उपराज्यपाल ने दक्षिण दिल्ली के नवजीवन विहार का दौरा कर वहां की व्यवस्था को सराहा। यह कॉलोनी पिछले आठ वर्षों से इस मॉडल पर सफल काम कर रही है। यहां के निवासियों ने अब तक 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को लैंडफिल तक जाने से रोका है। यहां मौजूद एरोबिक कम्पोस्टिंग यूनिट और RRR (रिड्यूस-रीयूज-रिसाइकल) सेंटर अब पूरे दिल्ली के लिए एक मॉडल बन चुके हैं।

संसाधनों के लिए CSR का सहारा प्रशासन का मानना है कि संसाधन की कमी इस मॉडल के विस्तार में बाधा नहीं बनेगी। उपराज्यपाल ने सुझाव दिया है कि जिन इलाकों में बजट की समस्या है, वहां कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के जरिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। निजी क्षेत्र की भागीदारी से इस अभियान को और अधिक गति दी जाएगी।

आर्थिक प्रोत्साहन और सहभागिता दिल्ली में अभी 650 से अधिक कॉलोनियां इस दिशा में काम कर रही हैं। एमसीडी की सहभागिता योजना के तहत, जो सोसाइटी कचरे को अलग करने का काम करती है, उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स का 10 प्रतिशत हिस्सा विकास कार्यों के लिए वापस दिया जाता है। शत-प्रतिशत कचरा पृथक्करण सुनिश्चित करने पर अतिरिक्त 5 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि भी मिलती है।

अस्पतालों तक पहुंचेगा मिशन कचरा प्रबंधन केवल कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार दिल्ली के नौ प्रमुख अस्पतालों में भी इस मॉडल को लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रतिदिन निकलने वाले 13,641 किलोग्राम बायोमेडिकल कचरे का प्रसंस्करण अब अस्पताल परिसरों के भीतर ही करने का लक्ष्य है, जिससे पर्यावरणीय जोखिमों को कम किया जा सके।

बड़ा लक्ष्य, बड़ी राहत दिल्ली में हर दिन 11,862 टन ठोस कचरा पैदा होता है, जिसका केवल 63 प्रतिशत ही प्रोसेस हो पाता है। अगले साल मई तक 100 नई कॉलोनियों को जीरो-वेस्ट बनाकर प्रशासन न केवल गाजीपुर, भलस्वा और ओखला के कचरे के पहाड़ों को छोटा करना चाहता है, बल्कि दिल्ली को एक स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है।

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