मंदिरों का दान अब डिजिटल: पारदर्शिता को लेकर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने मांगा ऑडिट
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मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे और उसके प्रबंधन को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अयोध्या राम मंदिर में दान विवाद के बाद, अब राज्य सरकार मंदिरों में ‘डिजिटल दान’ प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है। वहीं, विपक्ष ने इसे लेकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है।

डिजिटल दान की ओर सरकार के कदम धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग अब मंदिरों को तकनीक से लैस करने की तैयारी में है। राज्य के प्रमुख देवस्थानों, विशेषकर महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर में नकद लेन-देन को कम कर क्यूआर कोड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को अनिवार्य करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य एक पारदर्शी मॉडल तैयार करना है, जिसके लिए देश के अन्य बड़े मंदिरों के प्रबंधन का अध्ययन किया जा रहा है।

ओरछा के रामराजा मंदिर का पुराना जख्म मंदिरों की वित्तीय पारदर्शिता की चर्चा के बीच ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर का पुराना मामला फिर सुर्खियों में है। वर्ष 2017 में मंदिर के तत्कालीन लिपिक पर दान और आभूषणों में हेरफेर के आरोप लगे थे। हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने सालों तक जांच किसी निष्कर्ष पर क्यों नहीं पहुंची और अनियमितताओं का जवाबदेह कौन था?

कांग्रेस का हमला: ऑडिट कराओ कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने मांग की है कि केवल दान ही नहीं, बल्कि महाकाल लोक और श्रीराम लोक जैसी बड़ी परियोजनाओं के खर्च का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी परियोजनाओं में भारी अनियमितताएं हुई हैं।

विपक्ष और संत समाज की मांग विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। वहीं, संत समाज ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। संत सुरक्षा समिति के दिग्गजों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से मंदिर प्रबंधन के प्रति भक्तों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

महाकाल और ओंकारेश्वर पर विशेष फोकस सरकारी सूत्रों के मुताबिक, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे मंदिरों में दान की भारी आवक को देखते हुए वहां सबसे पहले निगरानी तंत्र को डिजिटल किया जाएगा। इससे दान की प्राप्ति से लेकर उसके उपयोग तक का हर विवरण डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध रहेगा, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

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