अयोध्या: दान में चोरी का विवाद और 3000 साल पुराने इतिहास का सच
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अयोध्या चंदा विवाद: SIT की रिपोर्ट सौंपी गई राम मंदिर में दान (चढ़ावा) चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंप दी है। हालांकि रिपोर्ट की सामग्री पूरी तरह गोपनीय रखी गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसके आधार पर जल्द ही बड़े खुलासे हो सकते हैं और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अथर्ववेद में अयोध्या का उल्लेख इस विवाद के बीच अयोध्या के प्राचीन इतिहास पर चर्चा तेज है। अथर्ववेद के 10वें मंडल के दूसरे सूक्त में अयोध्या को देवों की पुरी कहा गया है। ऋचाओं में वर्णित है कि आठ चक्राकार महलों और नौ द्वारों वाली यह नगरी न केवल बसी हुई थी, बल्कि अत्यंत संपन्न और प्रकाशमान थी। यह स्पष्ट करता है कि वैदिक काल में अयोध्या का अस्तित्व एक विकसित नगर के रूप में था।

सप्तपुरियों में प्रमुख स्थान हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में अयोध्या को सप्तपुरियों में गिना गया है। ये सात नगर—अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारका—मोक्षदायिनी माने जाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, इन नगरों के दर्शन मात्र से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति संभव है।

कितनी पुरानी है रामनगरी? अयोध्या की आयु को लेकर इतिहासकारों और विद्वानों में मतभेद है। इतिहासकार ए.एल. बाशम और मैक्डोनाल्ड जैसे विशेषज्ञों का तर्क है कि अथर्ववेद के संकलन के आधार पर अयोध्या करीब 3000 साल पुरानी है। वहीं, कुछ विद्वान इसे 2500 साल पुरानी मानते हैं।

धार्मिक गणना बनाम आधुनिक इतिहास दूसरी ओर, वैदिक विद्वान इस गणना को नकारते हैं। वे तर्क देते हैं कि वेद श्रुति परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे थे, उनका संकलन बहुत बाद में हुआ। विक्रम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति बी.के. शर्मा के अनुसार, भगवान राम का जन्म त्रेता युग की शुरुआत में हुआ था। यदि युगों की गणना (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग) को आधार मानें, तो यह समय आज से लगभग 8.70 लाख वर्ष पूर्व का ठहरता है।

आगे क्या होगा? फिलहाल पूरा ध्यान एसआईटी की रिपोर्ट पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि दान पेटी में हुई चोरी की सच्चाई क्या है और इसके पीछे कौन-कौन शामिल है। चंदा विवाद सुलझने के बाद प्रशासन मंदिर की सुरक्षा और दान प्रबंधन प्रणाली में बड़े बदलाव कर सकता है।

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