अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रामलला के पूर्व पक्षकार और हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास बाबा ने इस घटना को एक घिनौना अपराध करार दिया है। उन्होंने कहा कि भगवान के हिस्से का धन चुराना अक्षम्य है और इसके लिए कोई भी सजा कम है।
साधु का हक खाना सबसे बड़ा पाप महंत धर्मदास ने कहा, ब्राह्मण और साधु का हक मारना तो बड़ा अपराध है ही, लेकिन यहाँ तो सीधे भगवान के हिस्से में सेंध लगाई गई है। यह शर्मनाक है। लालच में आकर जिस तरह झूठे बहानों से लोगों को इकट्ठा किया गया और आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ, उसने पूरे देश की भावनाएं आहत की हैं।
योगी सरकार पर जताया भरोसा इस पूरे मामले पर महंत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार का इस हेराफेरी से कोई ताल्लुक नहीं है, बल्कि सीएम योगी ने खुद SIT का गठन कर यह साबित कर दिया है कि वे दोषियों को बख्शेंगे नहीं। उन्होंने कहा, हमें जांच टीम पर पूरा भरोसा है, दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।
ट्रस्ट मॉडल पर खड़े किए सवाल महंत धर्मदास ने अयोध्या में मौजूदा ट्रस्ट मॉडल पर सवाल उठाते हुए इसे बदलने की वकालत की। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा, वहां व्यवस्था पारदर्शी और चुस्त है। वहां कभी एक रुपये की हेराफेरी नहीं हो सकती। अयोध्या में ट्रस्ट के बजाय साधु-संतों की देखरेख वाली पारंपरिक व्यवस्था होनी चाहिए। ट्रस्ट का काम मंदिर प्रबंधन को सुचारू रखना है, न कि भगवान के चढ़ावे में दखल देना।
SIT की जांच: 150 पन्नों की रिपोर्ट और अहम सुराग राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIT ने सीएम योगी को 150 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है। 13 जून को गठित इस कमेटी ने 6 दिनों तक गहन तलाशी ली और 150 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकद राशि बरामद की गई है। इसके अलावा, मंदिर से चोरी हुए चांदी के आभूषण, हार, चरण पादुका और गदा जैसे बहुमूल्य सामानों की बरामदगी के भी संकेत मिल रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि SIT की रिपोर्ट के बाद वे चार बड़े चेहरे कौन हैं, जिन पर यह चोरी का आरोप लगा है।
*#WATCH | Ayodhya, UP | On the alleged Ram Mandir donation embezzlement case, Mahant Dharmadas Baba, former litigant for Ram Lalla and Mahant of Hanumangarhi Temple, says, There is no standard of punishment sufficient for the reprehensible act they have committed, an act… pic.twitter.com/L6KuD8LY3w
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 22, 2026
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