बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर ने एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। 28 वर्षीय भरत तिवारी क्रिमिनल था या सामाजिक कार्यकर्ता , यह सवाल अब राज्य की गलियारों से लेकर सर्वोच्च अदालत तक गूंज रहा है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ है।
फेसबुक लाइव से प्रशासन को चुनौती विवाद की शुरुआत 15-16 जून को हुई, जब भरत तिवारी ने हाथ में पिस्टल लेकर फेसबुक लाइव किया। उसने जिला प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। 17 जून को जब शाहपुर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ बिलौटी गांव पहुंचे, तो उन्होंने भरत को हथियार के साथ देखा। घंटों की बातचीत और मां की मिन्नतों के बावजूद भरत ने आत्मसमर्पण नहीं किया।
18 जून: एसटीएफ की घेराबंदी और आत्मसमर्पण तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब 18 जून को एसटीएफ ने भरत के घर को चारों ओर से घेर लिया। भरत ने तीन गोलियां चलाईं—दो जमीन में और एक हवा में। आखिरकार, उसने हथियार पुलिस के सामने फेंक दिए। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि हथियार फेंकने के बाद निहत्थे भरत पर पुलिस ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस का दावा ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने उसे मारने की मंशा से गोलियां चलाईं, जबकि शरीर से चार गोलियां बरामद होना पुलिस की थ्योरी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। घायल भरत को पटना पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
सड़कों पर फूटा उबाल 19 जून को भरत की मौत के बाद ग्रामीणों ने बक्सर-पटना फोरलेन को 8-10 घंटे तक जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बंदूकें तान दीं। मुआवजे की मांग को लेकर हुआ यह प्रदर्शन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
FIR का खेल और सियासत विवाद के बाद सरकार ने शाहपुर के तत्कालीन एसएचओ राजेश मालाकार को सस्पेंड कर दिया। हालांकि, पुलिस ने भरत के पिता और भाई पर ही अवैध हथियार छुपाने का मुकदमा दर्ज कर दिया। वहीं, जाम लगाने के आरोप में 50 से अधिक अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
मसीहा या विद्रोही? भरत तिवारी के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वह जवनिया गांव में गंगा कटाव से विस्थापित हुए 600 परिवारों के लिए संघर्ष करता दिख रहा है। गांव वाले उसे मसीहा मानते हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं का बिलौटी गांव आना-जाना जारी है। सांसद सुदामा प्रसाद ने परिवार के लिए 50 लाख मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की है। अब सबकी निगाहें न्यायिक जांच और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।
*बिहार के भोजपुर ज़िले के बिलौटी गांव में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में जिस भरत भूषण तिवारी (28) की गोली लगने से मौत हुई थी
— Adv Deepak Babu (@dbabuadvocate) June 21, 2026
उसी भरत भूषण का 16 जून 2026 का वीडियो है जब पुलिस उसे पकड़ने आई थी तो पुलिस बंदूक तान रखी तभी उसके बाद भरत भूषण ने अपनी पिस्तौल तान थी।
भरत भूषण का कोई भी… pic.twitter.com/bMV6v71aJu
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