स्विट्जरलैंड में बड़ा कूटनीतिक ड्रामा: ईरान का बॉयकॉट, बेबस खड़े रह गए जेडी वेंस
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स्विट्जरलैंड के आलीशान बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट में रविवार को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक नया और तनावपूर्ण अध्याय लिखा गया। इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत आयोजित इस शांति वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका को कड़ा झटका देते हुए न केवल फोटो-ऑप का बहिष्कार किया, बल्कि बैठक से वॉकआउट भी कर दिया।

कैमरों के सामने मीडिया शो का बहिष्‍कार तय कार्यक्रम के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत शुरू होने से पहले एक साझा फोटो-ऑप होना था। दुनिया भर के मीडिया की निगाहें इस ऐतिहासिक पल पर टिकी थीं। हालांकि, जैसे ही समय आया, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे केवल एक मीडिया शो करार देकर इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। वहां मौजूद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ स्थिति को देखकर हैरान रह गए।

वेंस की अनदेखी और अरागची का कड़ा रुख तनाव के बीच जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची बैठक स्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को पूरी तरह नज़रअंदाज कर दिया। अरागची ने सीधे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की ओर जाकर उनसे हाथ मिलाया और गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान जेडी वेंस ने अरागची की ओर देखा, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वर्षों बाद हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक की शुरुआत ही बेहद कड़वे अंदाज में हुई और ईरानी प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वहां से निकल गया।

ट्रंप की धमकी बनी बाधा ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस आक्रामक रुख के पीछे की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर किया गया एक पोस्ट था। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वे लेबनान में अपने प्रॉक्सी (हिज़्बुल्लाह) को नहीं रोकते हैं, तो अमेरिका ईरान पर पहले से भी अधिक ज़ोरदार सैन्य हमला करेगा। इस धमकी से भड़के ईरानी वार्ताकारों ने न केवल कड़ी आपत्ति जताई, बल्कि इसे कूटनीतिक बातचीत के दौरान अनुचित दबाव मानते हुए वॉकआउट का रास्ता चुना।

80 मिनट की बातचीत और भविष्य पर सवाल वॉकआउट से पहले दोनों पक्षों के बीच लगभग 80 मिनट तक चर्चा हुई थी। ईरान का मुख्य जोर इस्लामाबाद MoU के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर था। स्थिति के बावजूद, पर्दे के पीछे से कुछ सकारात्मक संकेतों की खबरें भी आ रही हैं। कतर की मध्यस्थता के जरिए ईरान के फंड जारी करने की प्रक्रिया को लेकर कुछ तकनीकी काम शुरू होने की पुष्टि की गई है। अब पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि ट्रंप की धमकियों और इस कूटनीतिक संकट के बीच क्या शांति वार्ता फिर से पटरी पर लौट पाएगी या यह अध्याय यहीं समाप्त हो जाएगा।

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