दिल्ली हाई कोर्ट ने मैसेंजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम से तीखे सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने जानना चाहा है कि परीक्षा पेपर लीक जैसी गंभीर स्थितियों को रोकने के लिए टेलीग्राम के पास रियल टाइम मॉनिटरिंग (तुरंत निगरानी) की क्या तकनीक है। यह मामला देश की बड़ी परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह टेलीग्राम का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम का ढांचा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बहुत अलग है। इसमें आसानी से बॉट्स बनाना और सूचनाओं को तेजी से फैलाना मुमकिन है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियां लाचार महसूस करती हैं।
टेलीग्राम की प्राइवेसी पॉलिसी पर भी कड़े सवाल उठे। सरकार ने तर्क दिया कि अकाउंट डिलीट होते ही सारा डेटा और मीडिया फाइलें हमेशा के लिए मिट जाती हैं। सॉलिसिटर जनरल के अनुसार, यह फीचर अपराधियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि सबूत मिटाने के बाद जांच एजेंसियों के लिए पड़ताल करना नामुमकिन हो जाता है।
सरकारी पक्ष ने वैश्विक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि टेलीग्राम अपनी बनावट की वजह से आतंकवादी गतिविधियों और देश विरोधी ताकतों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है। इसका आर्किटेक्चरल डिजाइन आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। कई अन्य देशों ने भी नियमों के उल्लंघन पर टेलीग्राम के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं।
कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि क्या कुछ लोगों की गलतियों की सजा प्लेटफॉर्म के 15 करोड़ यूजर्स को दी जा सकती है? इस पर सरकार ने जवाब दिया कि उनका लक्ष्य किसी के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय परीक्षाओं की साख बचाना है। टेलीग्राम के कुछ खास फीचर्स, जैसे मैसेज की टाइमस्टैम्प बदलने की सुविधा, छात्रों के बीच पुरानी तारीखों में फर्जी पेपर लीक की अफवाह फैलाकर दहशत पैदा कर रही है।
सॉलिसिटर जनरल ने टेलीग्राम को एक फ्रेंकस्टीन (बेकाबू खूंखार चीज) की संज्ञा दी। उन्होंने तर्क दिया कि मुनाफा कमाने वाले प्लेटफॉर्म आनुपातिकता के सिद्धांत (proportionality principle) का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। अन्य लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इसलिए नहीं छेड़ा गया है, क्योंकि उनके पास कंटेंट फिल्टर करने की मजबूत प्रणाली मौजूद है।
फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट ने NEET परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
The Delhi High Court asked Telegram to explain what mechanisms it has for real-time monitoring and surveillance on its platform, particularly to prevent the immediate spread of illegal content in situations such as examination paper leaks.
— IANS (@ians_india) June 18, 2026
During the hearing, Solicitor General… pic.twitter.com/rprdXK5gFR
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