ममता बनर्जी की सुरक्षा में कटौती: राजनीतिक प्रतिशोध या प्रशासनिक फेरबदल?
News Image

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा अधिकारी को हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है, वहीं भाजपा ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।

अचानक बदली गई सुरक्षा व्यवस्था विवाद की शुरुआत तब हुई जब टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि रात के करीब 9:30 बजे ममता बनर्जी के साथ पिछले 20 वर्षों से तैनात पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) को उनके कोलकाता आवास से हटा दिया गया। उन्होंने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि वहां ममता बनर्जी की सुरक्षा के लिए कोई मौजूद नहीं था।

टीएमसी का तीखा हमला: राजनीतिक प्रतिशोध टीएमसी ने इस कदम को राजनीतिक प्रतिशोध का निचला स्तर बताया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिर्फ सुरक्षा में बदलाव नहीं, बल्कि ममता बनर्जी को अलग-थलग करने और उनकी जान को खतरे में डालने की एक सोची-समझी साजिश है।

सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी ने नए सुरक्षा अधिकारियों को स्वीकार करने से मना कर दिया है, क्योंकि उन्हें अपने पुराने और भरोसेमंद सुरक्षाकर्मी पर ही विश्वास है।

महुआ मोइत्रा का सरकार पर निशाना सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे को दोहरे मापदंडों से जोड़ दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक तीन बार की मुख्यमंत्री और सात बार की सांसद को अपमानित किया जा रहा है और उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है, जबकि दूसरी तरफ मोहन भागवत को भारी सुरक्षा और कमांडो सुरक्षा दी जा रही है। उन्होंने मौजूदा सरकार को बेशर्म और प्रतिशोध की भावना से भरी बताया।

भाजपा का पलटवार विपक्ष के इन आरोपों पर भाजपा विधायक असीम सरकार ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी अब पूर्व मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उन्हें उनके मौजूदा पद के अनुरूप ही सुरक्षा प्रदान की जा रही है। भाजपा का मानना है कि इसमें कोई राजनीतिक दुर्भावना नहीं है, बल्कि यह नियमों के तहत की गई प्रशासनिक कार्रवाई है।

मुश्किलों में घिरी ममता बनर्जी यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। हाल ही में टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर त्रिपुरा की एक अन्य पार्टी में विलय कर लिया है। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बागी नेता रितब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने की याचिका खारिज कर दिए जाने से भी ममता खेमे को बड़ा झटका लगा है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

15 साल की अक्षरा का विस्फोट : 126 गेंदों में ठोके नाबाद 306 रन, बिहार की बेटी ने रचा इतिहास

Story 1

ऐतिहासिक शांति: अमेरिका-ईरान में इस्लामाबाद समझौता , जंग खत्म और होर्मुज जलडमरूमध्य हुआ बहाल

Story 1

तमिलनाडु विधानसभा में 25 साल बाद गूंजा राष्ट्रगान: क्या CM विजय ने खोज लिया बैलेंसिंग एक्ट ?

Story 1

तेज प्रताप और लॉरेंस बिश्नोई का कनेक्शन? आकाश यादव की शिकायत पर कोर्ट में केस दर्ज

Story 1

मुंबई में ऐसा पहले कभी नहीं देखा... : भीषण गर्मी और बिजली कटौती ने लोगों को सड़कों पर सोने के लिए किया मजबूर

Story 1

एक कमरे से फीफा वर्ल्ड कप तक: पाकिस्तानी इंजीनियर की गोल्डन फुटबॉल कहानी

Story 1

जब ट्रंप ने पीएम मोदी को कहा फरिश्ता , तो हंसी नहीं रोक पाए प्रधानमंत्री; जानें क्या थी वजह

Story 1

फ्लोरिडा में देवदूत बने ICE अफसर: डूबते 6 साल के बच्चे की बचाई जान

Story 1

बीमार फैन को देख छलके पवन कल्याण के आंसू, इलाज के लिए दिए 1 लाख रुपये

Story 1

2047 तक सत्ता से बाहर रहेगी सपा, सदन शुरू होने से पहले ही होगा बड़ा खेल : ओम प्रकाश राजभर