ऐतिहासिक शांति: अमेरिका-ईरान में इस्लामाबाद समझौता , जंग खत्म और होर्मुज जलडमरूमध्य हुआ बहाल
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दुनिया के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी, अमेरिका और ईरान, ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअली 14-पॉइंट वाले ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर मुहर लगाई है। इस डील के साथ ही मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के अंत की उम्मीद जगी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। ईरान ने जहाजों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की गारंटी दी है, जिससे वैश्विक तेल बाजारों में स्थिरता आने की संभावना है।

डील की मुख्य 14 शर्तें

इस समझौते के तहत दोनों देशों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति जताई है:

  1. तत्काल युद्धविराम: सभी मोर्चों पर फायरिंग और सैन्य संघर्ष तुरंत बंद होगा।
  2. आक्रामकता पर रोक: कोई भी देश एक-दूसरे पर हमला या धमकी नहीं देगा।
  3. संप्रभुता का सम्मान: दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का पूरा सम्मान करेंगे।
  4. वार्ता की समयसीमा: अंतिम शांति समझौते के लिए 60 दिनों की अल्टीमेटम अवधि तय की गई है।
  5. सैन्य वापसी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाकर सेना को वापस बुलाएगा।
  6. आर्थिक पैकेज: अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की योजना शुरू करेगा।
  7. प्रतिबंधों में ढील: ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
  8. परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
  9. यथास्थिति: कोई भी देश फिलहाल कोई नया सैन्य या प्रतिबंधात्मक कदम नहीं उठाएगा।
  10. तेल और बैंकिंग: ईरान को तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षेत्र में विशेष छूट दी जाएगी।
  11. संपत्ति की बहाली: ईरान की विदेश में फंसी हुई संपत्ति और धन को रिलीज किया जाएगा।
  12. निगरानी तंत्र: समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी एक अंतरराष्ट्रीय संस्था करेगी।
  13. UN की मुहर: अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए वैधता दी जाएगी।
  14. सहयोग की शुरुआत: विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए एक स्थायी चैनल स्थापित होगा।

कूटनीतिक जीत का दावा

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता से यह समझौता संभव हुआ है। इस डील को मध्य पूर्व के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

फ्रांस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, पूरी दुनिया की निगाहें अब इस समझौते के जमीनी असर पर टिकी हैं। होर्मुज का खुलना न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है, बल्कि यह क्षेत्र में शांति की नई शुरुआत भी है।

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