मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें उस समय बढ़ गईं जब अमेरिका और ईरान के बीच 14 शर्तों वाला एक बड़ा शांति समझौता साइन हुआ। फ्रांस में ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की मौजूदगी में इस डील पर मुहर लगी है। हालांकि, इस समझौते के आते ही इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव के नए संकेत मिलने लगे हैं।
इस 14-सूत्रीय समझौते में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने का संकल्प लिया है। दोनों पक्ष परमाणु सामग्री के प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में एक तंत्र विकसित करने पर राजी हुए हैं। साथ ही, दोनों देशों ने भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या धमकी से बचने का भी वादा किया है।
इस शांति समझौते की एक शर्त इजरायल के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई है। डील में लेबनान और ईरान से जुड़े सहयोगियों (हिजबुल्लाह) के खिलाफ तत्काल और स्थायी युद्धविराम की बात कही गई है। इजरायल किसी भी कीमत पर हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना चाहता है, जबकि यह समझौता युद्धविराम की मांग करता है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस डील को सिरे से नकारते हुए कड़े तेवर दिखाए हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि समझौता हो या न हो, वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे। नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि इजरायल और अमेरिका के हित हमेशा एक नहीं होते।
विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों पर तो शायद चुप रह जाए, लेकिन लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान रोकने की शर्त उसे कतई मंजूर नहीं होगी। नेतन्याहू ने पहले ही कह दिया है कि लाखों इजरायली नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता, भले ही इसके लिए अमेरिका से अलग स्टैंड क्यों न लेना पड़े।
फिलहाल यह समझौता क्षेत्र में शांति की एक बड़ी पहल तो है, लेकिन इजरायल की आक्रामक नीति के सामने यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। देखना यह होगा कि क्या अमेरिका अपने इस ऐतिहासिक समझौते को लागू करवाने के लिए इजरायल पर दबाव बना पाएगा, या नेतन्याहू इस डील के बावजूद लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे।
עם הסכם, בלי הסכם - כל עוד אני ראש ממשלת ישראל, לאיראן לא יהיה נשק גרעיני. pic.twitter.com/CdGChKskph
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) June 16, 2026
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