US-Iran समझौते से खुला होर्मुज : क्या अब सस्ती होगी आपकी जेब? जानें 10 बड़ी बातें
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करीब चार महीने तक वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रखने वाले पश्चिम एशिया संकट के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल आपूर्ति लाइन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का लाइफलाइन माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी तंग समुद्री रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर है। हालिया तनाव के चलते यह मार्ग बाधित था, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं।

होर्मुज खुला, पेट्रोल-डीजल को राहत: 10 बड़ी बातें

  1. सप्लाई में सुधार: दुनिया के 20% तेल और LNG की आवाजाही शुरू होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार ने राहत की सांस ली है।
  2. कीमतों में गिरावट: ब्रेंट क्रूड फिसलकर 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर है।
  3. भारत को फायदा: भारत अपनी ज़रूरत का 85% तेल आयात करता है। कच्चे तेल के सस्ता होने से भारत के आयात बिल में कमी आएगी।
  4. पेट्रोल-डीजल पर असर: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट से आने वाले हफ्तों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
  5. अभी जंग पूरी तरह खत्म नहीं: यह केवल एक अंतरिम समझौता है। दोनों देशों के पास अंतिम शांति के लिए 60 दिन हैं। परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दे अभी भी पेंडिंग हैं।
  6. ईरान की राहत: प्रतिबंधों में ढील से ईरानी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
  7. इजरायल की टेंशन: अमेरिका-ईरान के करीब आने से इजरायल पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा खतरा मानता है।
  8. महंगाई में कमी: तेल सस्ता होने से लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत घटेगी, जिससे वैश्विक महंगाई पर लगाम लग सकती है।
  9. भारतीय अर्थव्यवस्था: आयात बिल घटने से चालू खाते का घाटा सुधरेगा और रुपये की स्थिति मजबूत होगी।
  10. नया जियोपॉलिटिकल ऑर्डर: इस संकट ने साबित कर दिया है कि अब वैश्विक राजनीति में खाड़ी देशों और एशियाई शक्तियों की भूमिका अहम हो गई है।

भारत की स्थिति: क्या आम आदमी को मिलेगी राहत?

भारत के आयात बिल में कमी आने से सरकार का राजकोषीय संतुलन सुधरेगा। अर्थशास्त्री रघुराम राजन का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनी रहती है, तो भारत की विकास दर को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत बड़ी कटौती की संभावना कम है, क्योंकि तेल कंपनियां युद्धकाल के दौरान हुए नुकसान और इन्वेंट्री लागत को पहले कवर करेंगी।

आगे क्या?

होर्मुज का खुलना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञ अभी भी सतर्क हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लगेगा। यदि शांति बनी रहती है, तो आने वाले समय में ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता आने की पूरी उम्मीद है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते ने वैश्विक कूटनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है।

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