केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर चल रही सियासी हलचल तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हालिया संकेतों ने साफ कर दिया है कि सरकार अब इस बिल को नए कलेवर में संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।
नायडू का बड़ा संकेत: सबके लिए 50 फीसदी का न्याय चंद्रबाबू नायडू ने संकेत दिए हैं कि सरकार परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को एक साथ लाने की योजना बना रही है। नायडू के अनुसार, सरकार सभी राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत तक आनुपातिक बढ़ोतरी करना चाहती है ताकि उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच संतुलन बना रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछली बार बिल के ड्राफ्ट में कुछ कमियां रह गई थीं, जिसे विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बना दिया था।
बदल जाएगा संसद का गणित प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर करीब 850 तक हो सकती है। सरकार का तर्क है कि आनुपातिक बढ़ोतरी से किसी भी राज्य का हक नहीं मारा जाएगा, क्योंकि सभी राज्यों को समान अनुपात में सीटें मिलेंगी। 2026 में हुए विफल प्रयास के बाद, सरकार इस बार इसे सर्वसम्मति से पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है।
शशि थरूर का तीखा हमला: सैलरी वाला तर्क कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नायडू के इस फॉर्मूले को सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक थॉट एक्सपेरिमेंट के जरिए उन्होंने समझाया कि कैसे 50% की बढ़ोतरी का गणित भी असमानता बढ़ाएगा।
थरूर ने सैलरी का उदाहरण देते हुए कहा, अगर अमीर की सैलरी 2 लाख में 50% बढ़े और गरीब की 20 हजार में 50% बढ़े, तो प्रतिशत तो समान है, लेकिन अमीर और गरीब के बीच की वास्तविक दूरी (गैप) और अधिक चौड़ी हो जाएगी।
क्या है असली डर? थरूर का तर्क यह है कि अगर उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से 120 होती हैं और केरल की 20 से 30, तो सीटों का अंतर 60 से बढ़कर 90 हो जाएगा। यानी, बड़े आबादी वाले राज्यों को मिलने वाली अतिरिक्त सीटों की संख्या छोटे राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक होगी, जिससे केंद्र की सत्ता पर उत्तर भारतीय राज्यों का वर्चस्व और मजबूत होने की आशंका है।
आगे की राह क्या? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि NDA सरकार इस बार विपक्ष को समझाने के लिए अलग रणनीति अपना सकती है। हालांकि, दक्षिणी राज्यों की नाराजगी और थरूर जैसे नेताओं का विरोध यह स्पष्ट करता है कि संसद के अगले सत्र में यह मुद्दा एक बड़े सियासी घमासान का केंद्र बनने वाला है। क्या सरकार इस बार दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटा पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
Naidu ji, let’s try a thought experiment. Say your salary is 2 lakhs and your driver’s is 20,000. You announce a 50% increase for everybody. Your salary is now 3 lakhs and your driver’s is 30,000. The percentage or proportional increase is the same — but aren’t you much better… pic.twitter.com/VPLAeMuSOl
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 17, 2026
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