ट्रंप का बड़ा यू-टर्न: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर बदली नीति, समझौते के बाद नरम पड़े सुर
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अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के लागू होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान के पास सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रहने पर उन्हें अब कोई विशेष आपत्ति नहीं है।

ईरान को मिसाइल रखने का हक

फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान ट्रंप ने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर अपनी पुरानी सख्त नीति से किनारा कर लिया। उन्होंने कहा, अगर सऊदी अरब और कतर जैसे अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को इससे पूरी तरह रोकना अनुचित होगा।

ट्रंप ने तर्क दिया कि मिसाइलें परमाणु हथियारों जितनी खतरनाक नहीं होतीं। उनके अनुसार, मिसाइलें किसी क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे दुनिया को तबाह करने की क्षमता नहीं रखतीं, जो परमाणु हथियारों का मुख्य खतरा है।

युद्ध के दौरान लिया गया था सख्त स्टैंड

ट्रंप का यह बयान उनके पिछले रुख के बिल्कुल विपरीत है। 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह नष्ट करना था। विश्लेषक इसे ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक रणनीति में बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगले 60 दिनों तक मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी।

यूरेनियम भंडार पर भी नरमी

समझौते के विवरण के अनुसार, ईरान पर अपने उच्च स्तर तक संवर्धित (enriched) यूरेनियम के भंडार को तुरंत सौंपने का कोई दबाव नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद यह सामग्री अब उतनी महत्वपूर्ण नहीं रह गई है। उन्होंने इसे एक मनोवैज्ञानिक मुद्दा करार देते हुए कहा कि इसे आईएईए (IAEA) की निगरानी में धीरे-धीरे कम किया जाएगा।

जमी हुई संपत्तियों की वापसी और फंड

ट्रंप ने ईरान की रुकी हुई संपत्तियों को वापस करने के संकेत भी दिए हैं। उन्होंने कहा, वह ईरान का अपना पैसा है और मुझे लगता है कि हमें उसे वापस करना होगा। अमेरिका ने ईरान के 300 बिलियन डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन फंड को भी मान्यता दे दी है। ट्रंप का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान के पैसे को लंबे समय तक रोककर रखता है, तो इससे वैश्विक निवेशकों का अमेरिकी डॉलर पर भरोसा कम हो सकता है।

आधिकारिक हस्ताक्षर के साथ डील फाइनल

फ्रांस के वर्साय पैलेस में ट्रंप के हस्ताक्षर के कुछ घंटों बाद ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी एमओयू पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर यह समझौता शांति की कितनी गारंटी दे पाता है।

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