मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासनहीनता का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में प्रदर्शन न करना NSUI के 22 जिला अध्यक्षों को भारी पड़ गया है। प्रदेश नेतृत्व ने इन पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर 16 जून 2026 को पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम तय किया गया था। इस निर्देश के बावजूद 22 जिलों में कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरना तो दूर, कार्यक्रम तक आयोजित नहीं किया।
क्यों बरपा है बवाल? NSUI कार्यालय सचिव घनश्याम हारोड़े द्वारा जारी नोटिस में इसे घोर लापरवाही और उदासीनता करार दिया गया है। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया और आधिकारिक ग्रुप्स के जरिए पहले ही दे दी गई थी। निर्देशों की इस खुली अवहेलना को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।
तीन दिन में देना होगा जवाब नोटिस में सभी 22 जिला अध्यक्षों को तीन दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो इन पदाधिकारियों को उनके पद से हटाया जा सकता है।
किन जिलों पर गिरी गाज? कार्रवाई की जद में मुरैना, दतिया, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सीधी, कटनी, नरसिंहपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, बैतूल, देवास, उज्जैन, शाजापुर, नीमच, इंदौर, खरगोन, बड़वानी और अलीराजपुर के अध्यक्ष शामिल हैं। इसमें ग्वालियर-चंबल से लेकर मालवा-निमाड़ तक के प्रमुख जिले शामिल हैं।
बीजेपी ने कसा तंज इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के नेतृत्व पर सीधा हमला बोला है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि यह कांग्रेस में बढ़ रही गुटबाजी और नेतृत्व संकट का प्रमाण है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कार्यकर्ता अब पार्टी नेतृत्व के आह्वान पर सड़क पर उतरने को तैयार नहीं हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की स्वीकारोक्ति बताया है कि वे हार के बाद की नौटंकी से खुद अपने कार्यकर्ताओं को सहमत नहीं कर पा रहे हैं।
बढ़ सकती है सियासी गर्मी इस लेटर वार ने कांग्रेस के भीतर मची रार को सार्वजनिक कर दिया है। एक ओर जहां संगठन अपनी साख बचाने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश करने में जुट गए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और हलचल पैदा कर सकता है।
*आंदोलन नहीं हुआ तो नोटिस जारी करना पड़ा!
— Ashish Usha Agarwal आशीष ऊषा अग्रवाल (@Ashish_HG) June 17, 2026
यह सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि कांग्रेस की स्वीकारोक्ति है कि उसके कार्यकर्ता और युवा अब नेतृत्व के आह्वान पर सड़क पर उतरने को तैयार नहीं हैं।
राज्यसभा चुनाव में हार के बाद की नौटंकी से खुद कांग्रेस का कार्यकर्ता सहमत नहीं है। हालात ऐसे हैं… pic.twitter.com/nyFMpHdFY4
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