शिवसेना में ऑपरेशन तोड़फोड़ : जयराम रमेश का बड़ा दावा- 2/3 बहुमत के लिए बेचैन हैं मोदी-शाह
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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में मची हलचल के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बड़ा सियासी धमाका किया है। रमेश ने दावा किया है कि शिवसेना के सांसदों का अलग गुट बनाना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी साजिश है।

संविधान संशोधन की विफलता बनी वजह जयराम रमेश के अनुसार, इस पूरी तोड़फोड़ के पीछे 17 अप्रैल 2026 की घटना है। उस दिन सरकार संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित कराने में विफल रही थी। रमेश का आरोप है कि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने और परिसीमन के मुद्दे पर हुई बेइज्जती के बाद से ही गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी विपक्ष को कमजोर करने में जुट गए हैं।

नेशनल डिफेक्टर अलायंस का नाम दिया कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि यह एनडीए (NDA) नहीं, बल्कि नेशनल डिफेक्टर अलायंस है। उन्होंने कहा कि अमित शाह जिस गृह मंत्रालय की कुर्सी पर बैठे हैं, उस पर कभी सरदार पटेल बैठते थे, लेकिन आज वहां से गंदी राजनीति की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार विपक्ष का मनोबल तोड़ना चाहती है।

सांसदों की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप पार्टी नेता संजय राउत ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राउत का दावा है कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच दिया गया है, जिसमें 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए जा चुके हैं। राउत ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।

उद्धव गुट की सख्त चेतावनी उधर, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने बृहस्पतिवार को एक संसदीय दल की बैठक बुलाई है। नेता अरविंद सावंत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई बागी सांसद व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है असली क्रोनोलॉजी ? जयराम रमेश का मानना है कि सब कुछ एक तय रणनीति के तहत हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को घटनाओं के क्रम को समझना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार को वह जादुई 2/3 बहुमत नहीं मिलेगा, जिसके लिए वे पार्टियां तोड़ने पर आमादा हैं।

अब सबकी नजरें कल होने वाली संसदीय दल की बैठक पर टिकी हैं कि क्या ठाकरे गुट अपने कुनबे को बचाने में कामयाब होगा या ऑपरेशन टाइगर के तहत और सांसद बागी रुख अपनाएंगे।

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