नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा परिणाम और पेपर लीक के आरोपों ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच अब विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए सड़क पर उतरने की रणनीति तैयार कर ली है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का हालिया वीडियो इस आंदोलन को एक नई धार देने की कोशिश है।
केजरीवाल का आह्वान: सड़कों पर नहीं उतरे तो माफ नहीं करेगी आने वाली पीढ़ी अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और आम जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की है। उनका तर्क है कि जब तक जनता का दबाव सरकार पर नहीं बनेगा, तब तक वह अपनी नींद से नहीं जागेगी। केजरीवाल ने इसे भविष्य की लड़ाई बताते हुए कहा कि अगर आज चुप्पी साधे रखी, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
कॉमेडी सर्कस वाली सरकार पर निशाना केजरीवाल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे कॉमेडी सर्कस करार दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार सुरक्षा के ऊंचे दावे करती है, तो दूसरी तरफ टेलीग्राम बैन जैसे कदम उठाती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही शासन की कला है? उनके अनुसार, सरकार गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।
पेपर लीक का पैसा: क्या विधायकों की खरीद-फरोख्त का जरिया? केजरीवाल ने सबसे विस्फोटक आरोप लगाते हुए कहा कि पेपर लीक का बिजनेस मॉडल केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चेन है। उनका दावा है कि इस अवैध कमाई का पैसा सांसदों और विधायकों को खरीदने में खर्च किया जा रहा है। केजरीवाल के अनुसार, यही कारण है कि सरकार इस मुद्दे पर मौन साधे हुए है क्योंकि वे खुद इस तंत्र का हिस्सा हैं।
विपक्ष की एकजुटता और आगामी चुनाव नीट विवाद पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव पहले ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर चुके हैं। राहुल गांधी ने इसे युवाओं के सपनों की हत्या बताया है, तो अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी का संगम करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट का मुद्दा आगामी चुनावों में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। केजरीवाल अब इस असंतोष को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देकर विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में हैं।
समाधान क्या है? केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक तब तक नहीं रुकेंगे जब तक दोषियों को फांसी जैसी सख्त सजा न मिले। उन्होंने मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक हाई-लेवल जुडिशियल कमेटी का गठन किया जाए।
फिलहाल, यह संग्राम केवल छात्रों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शासन की नैतिकता और पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल बन गया है। क्या सरकार इस उबाल को दबा पाएगी या यह जनाक्रोश सत्ता की नींव हिला देगा, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।
First, IAF planes, now telegram ban. This govt. is a total comedy circus.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 18, 2026
Paper leaks will never stop. Because money from the business of paper leaks being used to buy MPs/MLAs? pic.twitter.com/KQLrCdPKeY
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