ऐतिहासिक समझौता: अमेरिका-ईरान में बनी शांति, होर्मुज स्ट्रेट से हटेगा तनाव
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वॉशिंगटन/तेहरान: लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दरकिनार करते हुए अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान द्वारा डिजिटल और भौतिक रूप से हस्ताक्षरित इस समझौते को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोकेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवाजाही को भी सामान्य बनाएगा।

सैन्य तनाव पर पूर्ण विराम

समझौते की पहली शर्त के तहत, लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से स्थायी युद्धविराम लागू किया गया है। अमेरिका और ईरान ने भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या धमकी न देने की कसम खाई है। दोनों देशों ने आपसी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी मुहर लगाई है।

समुद्री व्यापार और होर्मुज स्ट्रेट की बहाली

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अब व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। ईरान ने अगले 30 दिनों के भीतर तकनीकी अवरोधों और बारूदी सुरंगों को हटाकर समुद्री मार्गों को पूरी तरह चालू करने का वादा किया है। इसके बदले में, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगाई गई समुद्री नाकाबंदी और सैन्य प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक राहत

समझौते में परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ईरान ने फिर दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और IAEA की निगरानी में अपने परमाणु सामग्री का प्रबंधन करेगा। बदले में, अमेरिका ने तेल निर्यात पर लगी रोक को हटाते हुए ईरानी तेल, बैंकिंग और बीमा सेवाओं के लिए आवश्यक छूट प्रदान करने का निर्णय लिया है। साथ ही, ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।

300 बिलियन डॉलर का निवेश

आर्थिक मोर्चे पर ईरान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के निवेश और सहायता योजना पर काम करेगा। इस योजना की रूपरेखा अगले 60 दिनों के भीतर तैयार की जाएगी।

आगे की राह: 60 दिनों की निर्णायक वार्ता

यह समझौता एक अंतरिम व्यवस्था है। शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में 60 दिनों की विस्तृत वार्ता प्रक्रिया शुरू होगी, जिसका लक्ष्य एक व्यापक और स्थायी शांति समझौते को अंतिम रूप देना है। इस पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय वैधता देने के लिए अंत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी ली जाएगी।

इस समझौते को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। दुनिया की निगाहें अब अगले 60 दिनों के दौरान होने वाली वार्ता पर टिकी हैं।

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