ऑपरेशन टाइगर : उद्धव ठाकरे की शिवसेना में मची खलबली, क्या सांसद छोड़ेंगे साथ?
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महाराष्ट्र की सियासत में ऑपरेशन टाइगर ने हलचल पैदा कर दी है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-यूबीटी) के कई सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं। इन दावों को तब और बल मिला जब उद्धव गुट के सांसद संजय देशमुख ने शिंदे खेमे के केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की।

नेतृत्व के रवैये से सांसद नाराज? केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने ऑपरेशन टाइगर पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यह कोई बाहरी साजिश नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के रवैये का परिणाम है। जाधव के अनुसार, उद्धव गुट के सांसद और विधायक अपनी ही पार्टी में घुटन महसूस कर रहे हैं। उन्हें शक की नजर से देखा जाता है और उन पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं।

किसी भी वक्त भड़क सकता है असंतोष प्रतापराव जाधव ने दावा किया कि नेतृत्व का यह कहना कि जो रहना चाहते हैं रहें, नहीं तो जा सकते हैं , सांसदों के लिए अपमानजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी के भीतर पनप रहा यह असंतोष किसी भी क्षण विस्फोटक रूप ले सकता है। नेताओं का लगातार परेशान किया जाना उनके धैर्य की सीमा पार कर रहा है।

शिंदे गुट के लिए दरवाजे खुले इस पूरे घटनाक्रम के बीच, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता प्रताप सरनाइक ने साफ कर दिया है कि उनके दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। सरनाइक ने कहा कि जो लोग बाल ठाकरे के आदर्शों और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विश्वास रखते हैं, उनका स्वागत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उद्धव गुट के जनप्रतिनिधि वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट हैं, तो शिंदे गुट उन्हें प्राथमिकता देगा।

यूबीटी गुट का दावा- सब एकजुट हैं उधर, उद्धव ठाकरे गुट के नेता इन अटकलों को खारिज कर रहे हैं। संजय राउत ने दृढ़ता से कहा कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं। हालांकि, रविवार को बुलाई गई उद्धव ठाकरे की बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे थे, जबकि बाकी वर्चुअल जुड़े या अनुपस्थित रहे।

संजय देशमुख की मुलाकात ने बढ़ाए सवाल बैठक से दूर रहने वाले सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से दिल्ली में मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है। हालांकि देशमुख ने इसे निजी कारण बताया है, लेकिन विपक्षी खेमे इसे ऑपरेशन टाइगर की शुरुआत मान रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या यह असंतोष वास्तव में पार्टी में बड़ी टूट का कारण बनेगा या यह मात्र सियासी दबाव की रणनीति है।

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