क्या AI ले पाएगा पत्रकारों की जगह? राहुल कंवल बोले - इंसानी समझ और भरोसे का कोई विकल्प नहीं
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के दौर में पत्रकारिता के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच दिल्ली में आयोजित देवर्षि नारद जर्नलिस्ट अवॉर्ड्स 2026 में वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने स्पष्ट किया कि मशीनें कभी भी एक पत्रकार की जगह नहीं ले सकतीं।

AI और नारद मुनि का फर्क राहुल कंवल ने कहा कि AI भले ही डेटा प्रोसेस कर ले और खबरें लिख दे, लेकिन वह लोगों से जुड़ने, संदर्भ (context) को समझने और भरोसा कायम करने की इंसानी काबिलियत की बराबरी नहीं कर सकता। उन्होंने देवर्षि नारद का उदाहरण देते हुए कहा कि नारद मुनि सिर्फ सूचना पहुंचाने वाले नहीं थे, वे जमीनी हकीकत से जुड़कर जानकारी जुटाते थे।

उन्होंने कहा, AI क्लाउड में बैठकर डेटा का उपभोग करता है, जबकि नारद मुनि यात्राएं करते थे, लोगों से मिलते थे और उनकी संवेदनाओं को समझते थे। पत्रकारिता में यह मानवीय स्पर्श ही उसे भरोसेमंद बनाता है।

राजनीतिक चश्मे से बचना जरूरी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पत्रकारों को नसीहत दी कि वे समाज की हर समस्या को केवल राजनीतिक नजरिए से न देखें। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज की एक मुकम्मल और स्पष्ट तस्वीर पेश करना है, न कि उसे किसी एजेंडे के तहत दिखाना।

आंबेकर ने आगे कहा कि तकनीक का इस्तेमाल इंसानी भलाई और भारत की ज्ञान परंपराओं को मजबूत करने के लिए होना चाहिए, न कि इंसान की जगह लेने के लिए। उनका मानना है कि भविष्य भारत का है और सभी को राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर काम करना चाहिए।

12 पत्रकारों का हुआ सम्मान इस भव्य आयोजन में प्रिंट, टेलीविजन, डिजिटल, ग्रामीण रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 पत्रकारों को सम्मानित किया गया। विजेताओं में पूजा राणा (OpIndia), गरिमा उप्रेती (नो द नेशन), हिमानी दीवान (किसान तक), विमल त्यागी (पब्लिक मित्र) और प्रभात रंजन मिश्रा (द पैम्फलेट) जैसे नाम शामिल रहे।

विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल और 11,000 रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान छह सदस्यीय जूरी ने व्यापक मूल्यांकन के बाद इन नामों का चयन किया, जिसमें डीडी न्यूज और अन्य बड़े मीडिया संस्थानों के वरिष्ठ संपादक शामिल थे।

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