नेपाल के साथ संबंधों पर राम माधव का दो-टूक: बड़े भाई नहीं, सहयोगी बनकर चलना होगा
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नेपाल में बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और वहां के जन-आंदोलनों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने भारत-नेपाल रिश्तों को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अब बड़े भाई (Big Brother) वाली मानसिकता को पूरी तरह त्याग देना चाहिए।

क्या है बड़े भाई और एल्डर ब्रदर का अंतर? राम माधव ने स्पष्ट किया कि बड़े भाई (Big Brother) का अर्थ अक्सर दबदबा कायम करने या प्रभुत्व दिखाने से लिया जाता है, जो पड़ोसी देशों को पसंद नहीं है। इसके बजाय, भारत को एक एल्डर ब्रदर (अभिभावक या मार्गदर्शक) की भूमिका निभानी चाहिए, जो सम्मान और समानता पर आधारित हो।

संप्रभुता का सम्मान सर्वोपरि माधव ने कहा कि नेपाल हो या बांग्लादेश, ये संप्रभु देश हैं। भारत को केवल साझा सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों के पुराने चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें संप्रभु समानता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए। पड़ोसी देश छोटा है या बड़ा, यह मायने नहीं रखता। उनके साथ संबंध आज की भू-राजनीतिक (Geopolitical) वास्तविकताओं के अनुसार होने चाहिए।

नेपाल के नए नेतृत्व का स्वागत नेपाल में युवाओं पर आधारित नए नेतृत्व के उदय का स्वागत करते हुए माधव ने कहा कि यह बदलाव वहां के लोगों की आकांक्षाओं का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश में उठने वाले जन-आंदोलनों को विदेशी साजिश (जैसे CIA या ISI) करार देना गलत है। उन्होंने कहा, लोगों की भावनाओं और उनके द्वारा चुनी गई सरकार का सम्मान करना ही भारत की नीति होनी चाहिए।

महत्वपूर्ण बफर स्टेट है नेपाल भाजपा महासचिव ने माना कि नेपाल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण हिमालयी पड़ोसी है। चीन और भारत के बीच एक बफर स्टेट के रूप में नेपाल की भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने नेपाल के सत्ताधारी पार्टी अध्यक्ष और विदेश मंत्री का स्वागत पूरी गरिमा और प्रोटोकॉल के साथ किया है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने पड़ोसी को एक स्वतंत्र और बराबरी के देश के रूप में देखता है।

पुरानी थ्योरी से आगे बढ़ने का वक्त राम माधव ने अंत में यह संदेश दिया कि भारत को पुरानी यादों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि नेपाल का यह आरोप कि भारत बड़े भाई जैसा व्यवहार करता है, अब हमारे संबंधों में कहीं नहीं होना चाहिए। भारत की विदेश नीति का नया आधार समानता और आपसी सम्मान ही है।

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