यूएस-ईरान युद्ध का यू-टर्न : क्या यह स्थायी शांति है या ट्रंप का चुनावी दांव?
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पश्चिम एशिया के समंदर में सुलग रही बारूद की ढेरी पर दुनिया ने राहत की सांस ली है, लेकिन इस राहत के पीछे एक ऐसा कूटनीतिक रहस्य छिपा है जिसने वैश्विक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। युद्ध की कगार से अचानक शांति की मेज तक पहुंचने के इस सफर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुबह की धमकी: खार्ग द्वीप पर हमले का खौफ

गुरुवार की सुबह दुनिया ने डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रूप देखा। उन्होंने ईरान के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्ट हब, खार्ग द्वीप पर कब्जे और एक घातक सैन्य हमले की चेतावनी दी थी। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया और तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं ने जोर पकड़ लिया। ऐसा लग रहा था कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी वक्त मिसाइलें बरस सकती हैं।

दोपहर का यू-टर्न : क्या बंद कमरों में हुई डील?

कुछ ही घंटों के भीतर ओवल ऑफिस से आई खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया। ट्रंप ने अचानक सैन्य कार्रवाई रद्द करने का आदेश दिया और दावा किया कि ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता लगभग तय हो चुका है। सुबह तक जो अमेरिका युद्ध की स्क्रिप्ट लिख रहा था, दोपहर होते-होते सीज़फायर और सुलह की बात करने लगा।

सीक्रेट वीकेंड डील : यूरोप में होगी हस्ताक्षर की रस्म?

डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस समझौते की अंतिम शर्तें तय हो चुकी हैं। ट्रंप के अनुसार, स्टॉक मार्केट ने इस खबर का सकारात्मक स्वागत किया है। खबरें हैं कि इस वीकेंड यूरोप में एक भव्य साइनिंग सेरेमनी हो सकती है, जिसमें अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं।

परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का पेंच

ट्रंप का दावा है कि इस डील के बदले ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की अपनी महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए छोड़ने का वादा किया है। इसके बदले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का निर्णय लिया गया है। इस पूरी डील के लिए ट्रंप ने कतर, यूएई, सऊदी अरब और पाकिस्तान समेत कई क्षेत्रीय नेताओं से लंबी बातचीत की है।

ईरान का इनकार और सस्पेंस बना बरकरार

हालांकि, इस डील पर सस्पेंस अभी भी खत्म नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार के समझौते पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी शर्तों—जिनमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण और 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति की वापसी शामिल है—पर कोई समझौता नहीं करेंगे।

क्या यह सिर्फ एक चुनावी चाल है?

जमीनी हकीकत यह है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी बरकरार है। हाल ही में ओमान तट पर एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविकों की मौत के बाद ईरान का गुस्सा कम नहीं हुआ है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस वीकेंड पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या यह ट्रंप का कोई चुनावी स्टंट है, या फिर शांति वार्ता टूटने पर पश्चिम एशिया एक और भीषण तबाही की ओर बढ़ जाएगा?

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