600-700 लोगों ने मेरा रेप किया : ब्रिटिश संसद में गूंजी पीड़िताओं की चीखें, क्या है ग्रूमिंग गैंग का काला सच?
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ब्रिटेन एक बार फिर ‘ग्रूमिंग गैंग्स’ (बच्चों का यौन शोषण करने वाले गिरोह) के भयावह सच से दहल उठा है। हाल ही में ब्रिटिश संसद में सांसद रूपर्ट लो द्वारा पढ़ी गई पीड़िताओं की गवाहियों ने सरकारी तंत्र की विफलता और दरिंदगी की ऐसी परतें खोली हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

12 साल की उम्र, हजारों दरिंदे

संसद में सुनाई गई एक पीड़िता की आपबीती रोंगटे खड़े करने वाली है। उसने बताया, 13 से 16 साल की उम्र के बीच करीब 3 वर्षों में 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने मेरा बलात्कार किया। एक अन्य पीड़िता ने जानवरों के साथ यौन शोषण और वैन में पिंजरों में कैद लड़कियों का खौफनाक मंजर बयां किया। पीड़िताओं का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस और अस्पतालों ने उन्हें समस्या पैदा करने वाली समझकर नजरअंदाज कर दिया।

श्वेत लड़कियों की कोई इज्जत नहीं

इन गवाहियों में नस्ल और धर्म का घिनौना पहलू भी सामने आया है। पीड़िताओं ने बताया कि आरोपी अक्सर कहते थे कि श्वेत और ईसाई लड़कियों की कोई इज्जत नहीं होती। कई मामलों में पीड़ित लड़कियों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे श्वेत ब्रिटिश थीं। ईसाइयों के धार्मिक प्रतीकों का मजाक उड़ाना और मौलवियों के परिवारों से जुड़े लोगों का इन अपराधों में शामिल होना, इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील बना रहा है।

क्या था ग्रूमिंग का जाल?

ग्रूमिंग के जरिए ये गिरोह पहले बच्चों का विश्वास जीतते थे। वे उन्हें उपहार, प्यार और भावनात्मक सहारे का लालच देकर जाल में फंसाते थे। एक बार फंसाने के बाद, नशे और धमकियों के दम पर उनका यौन शोषण किया जाता था। रोदरहैम, मैनचेस्टर और हडर्सफील्ड जैसे शहरों से शुरू हुआ यह सिलसिला धीरे-धीरे ब्रिटेन के 50 से अधिक शहरों में फैल गया।

पाकिस्तानी मूल के आरोपियों और सिस्टम की चुप्पी

आधिकारिक रिपोर्टों और जांचों में यह बात सामने आई है कि कई बड़े गिरोहों में पाकिस्तानी मूल के पुरुष शामिल थे। हालांकि, इसे लेकर ब्रिटेन में दो फाड़ बहस है—एक पक्ष जहां अपराधियों की जातीय पृष्ठभूमि पर खुलकर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे पूरी कम्युनिटी को निशाना बनाने से रोकने की चेतावनी देता है। सबसे गंभीर आरोप सरकारी एजेंसियों पर हैं, जो दशकों तक नस्लीय संवेदनशीलता के नाम पर या अपनी नाकामी छुपाने के लिए इन अपराधों पर चुप रहीं।

अब आगे क्या?

ब्रिटिश सरकार ने अब एक स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच का वादा किया है। गृह मंत्री यवेट कूपर ने स्वीकार किया है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में गंभीर चूक हुई है। सरकार ने भविष्य में अपराधियों की जातीय पहचान के बेहतर रिकॉर्ड रखने और पुलिस जांच को मजबूत करने का संकल्प लिया है। लेकिन सवाल वही है—क्या वर्षों तक अनसुनी रहीं इन आवाजों को कभी न्याय मिल पाएगा?

ब्रिटिश संसद में रूपर्ट लो के शब्दों में कहें तो, अब बात करने का समय खत्म हो चुका है, अब केवल सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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