CBSE के OSM टेंडर का पर्दाफाश: 12वीं के छात्र ने संसद तक खोली पोल
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सीबीएसई (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के टेंडर में कथित धांधली का मामला अब संसद तक पहुँच गया है। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ करने वाले 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत को संसदीय स्थायी समिति ने तलब किया।

संसदीय समिति के सामने पेशी मंगलवार को सार्थक शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने पेश हुए। संसद भवन एनेक्स में हुई इस बैठक में सार्थक ने सीबीएसई के OSM टेंडर को लेकर सबूतों के साथ अपनी प्रेजेंटेशन दी। समिति ने सीबीएसई परीक्षाओं में OSM के इस्तेमाल और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्र द्वारा उठाए गए बिंदुओं की गहन समीक्षा की।

कौन हैं सार्थक सिद्धांत? झारखंड के रहने वाले 17 वर्षीय सार्थक ने इसी साल 12वीं की परीक्षा दी है। परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट होने के बाद जब उन्होंने अपनी आंसर शीट की री-इवैल्यूएशन कराई, तो उन्हें प्रक्रिया में झोल नजर आया। इसके बाद उन्होंने खुद सीबीएसई के टेंडर डॉक्यूमेंट्स को खंगालना शुरू किया और सोशल मीडिया पर इसकी खामियों को उजागर किया।

क्या है Coempt Eduteck का विवाद? सार्थक का आरोप है कि सीबीएसई के टेंडर नियमों में बार-बार बदलाव करके Coempt Eduteck नामक कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ब्लैकलिस्टिंग, टर्नओवर और तकनीकी योग्यता से जुड़े मानकों में ढील दी गई ताकि इस कंपनी को क्वालीफाई कराया जा सके।

विवादित कंपनी का पुराना रिकॉर्ड छात्र ने खुलासा किया कि Coempt Eduteck पहले Globarena Technologies के नाम से जानी जाती थी। यह वही कंपनी है, जिस पर 2019 में तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजों में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगा था। सार्थक का दावा है कि नियमों को इस तरह बदला गया कि विवादों में रहने वाली इस कंपनी को अयोग्य घोषित होने से बचाया जा सके।

टेंडर शर्तों के साथ खेल सार्थक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पुराने टेंडर में तीन ऐसे क्लॉज थे जो खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाते थे, लेकिन नए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) से उन्हें पूरी तरह हटा दिया गया। उन्होंने CMMI लेवल और प्रोजेक्ट पात्रता मानदंडों में की गई कटौती को भी सबूतों के साथ पेश किया।

क्या OSM सिस्टम के खिलाफ हैं छात्र? सार्थक ने स्पष्ट किया कि वे तकनीक के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि OSM एक अच्छा सुधार हो सकता है, लेकिन इसे बिना किसी व्यापक टेस्टिंग और पायलेट प्रोजेक्ट के लागू करना लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। फिलहाल, संसदीय समिति द्वारा इस मामले की जांच शुरू होने से सीबीएसई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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