ममता बनर्जी को बड़ा झटका: 57 बागी विधायकों ने विधानसभा में घेरा, टीएमसी में टूट की आहट
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी विधायक एकजुट होकर विधानसभा पहुंचे हैं। इन बागी विधायकों ने दावा किया है कि उनके पास 57 विधायकों का समर्थन है। यह संख्या ममता बनर्जी के लिए उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा संकट बन सकती है।

विधानसभा में हलचल

आज सुबह काले शीशे वाली गाड़ियों में सवार होकर बागी विधायक विधानसभा पहुंचे। इनमें ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस भी मौके पर मौजूद हैं। बागी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने स्पष्ट कहा कि उनके समर्थन पत्र पर कई विधायकों ने हस्ताक्षर किए हैं और जल्द ही पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

ममता के धरने का बेअसर होना

यह बगावत ऐसे समय में हुई है जब ममता बनर्जी खुद सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि कल कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने में महज 7 विधायक ही पहुंचे थे। टीएमसी ने चुनाव में कुल 80 सीटें जीती थीं, लेकिन जिस तरह से विधायकों की संख्या लगातार कम हो रही है, वह पार्टी की नींव हिलाने के लिए काफी है।

क्या महाराष्ट्र मॉडल दोहराया जाएगा?

बंगाल के गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यहां महाराष्ट्र का शिवसेना वाला प्रकरण दोहराया जा रहा है? अगर टीएमसी के 54 विधायक अलग गुट बना लेते हैं, तो उन पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा। ऐसी स्थिति में बागी गुट न केवल पार्टी के नाम पर, बल्कि चुनाव चिह्न (Symbol) पर भी दावा ठोक सकता है। बागी नेता रिजू दत्ता ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे पार्टी सिंबल हासिल करने के लिए भी तैयार हैं।

पार्टी के भीतर पनपा असंतोष

विद्रोह की मुख्य वजह टीएमसी के भीतर जारी आंतरिक कलह को माना जा रहा है। बागी विधायकों का आरोप है कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं का अपमान हो रहा है और आई-पैक (I-PAC) जैसी बाहरी सलाहकारों के दखल से पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और नेता बेहद नाराज हैं।

ममता बनर्जी का कठिन दौर

71 वर्षीय ममता बनर्जी के लिए यह उनके तीन दशक के राजनीतिक करियर का सबसे कठिन समय है। 1998 में जिस पार्टी को उन्होंने शून्य से खड़ा किया था, आज उसी पर उनके नियंत्रण को चुनौती मिल रही है। बंगाल के पिछले 50 वर्षों के इतिहास को देखें तो सत्ता से बाहर होने वाली पार्टी का दोबारा वापसी करना लगभग असंभव रहा है। क्या ममता अपनी पार्टी को बिखरने से बचा पाएंगी, या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा? सब कुछ अगले 24 घंटों में स्पष्ट होने की संभावना है।

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