दिल्ली के मालवीय नगर स्थित लेमन ग्रीन रेस्तरां में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली है। बुधवार सुबह हुई इस घटना ने बेसमेंट में बने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बेसमेंट में लगी आग इतनी जानलेवा क्यों साबित होती है? इसका विज्ञान और कारण समझना बेहद जरूरी है।
बेसमेंट में खिड़कियां नहीं होतीं, जिससे धुआं बाहर नहीं निकल पाता। आग लगते ही धुआं छत की ओर उठता है और वहां जमा होने लगता है। बाहर जाने का एकमात्र रास्ता सीढ़ियां होती हैं, जो चंद मिनटों में ही धुएं के गुब्बारे में बदल जाती हैं। अंधेरा होने के कारण बाहर निकलने का रास्ता दिखना भी बंद हो जाता है।
बेसमेंट में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है और कार्बन डाई ऑक्साइड का घनत्व बढ़ जाता है। वैज्ञानिक रूप से, कार्बन डाई ऑक्साइड महज 2 से 3 मिनट के भीतर इंसान को बेहोश करने की क्षमता रखती है। वेंटिलेशन न होने के कारण लोग आग से कम, दम घुटने से ज्यादा मरते हैं।
नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार, बेसमेंट की सीढ़ियां ऐसी होनी चाहिए कि वे ऊपर की मंजिलों के एग्जिट को ब्लॉक न करें। मालवीय नगर हादसे में भी यही हुआ—एकमात्र रास्ता होने के कारण लोग फंस गए। ऊपरी मंजिल पर आग लगने पर लोग खिड़कियों या बालकनी का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बेसमेंट में बचने के ऐसे सभी विकल्प खत्म हो जाते हैं।
किसी इमारत की ऊपरी मंजिल पर आग लगने पर दमकलकर्मी खिड़कियां तोड़कर या बाहर से पानी डालकर आग बुझा सकते हैं। बेसमेंट में यह मुमकिन नहीं होता। फायर फाइटर्स को भी उसी संकरी, धुएं से भरी सीढ़ी से अंदर घुसना पड़ता है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद धीमा हो जाता है और कीमती जान गंवाने का खतरा बढ़ जाता है।
बेसमेंट के रेस्तरां में आग को भड़काने के लिए भरपूर ईंधन मौजूद होता है। LPG सिलेंडर, लकड़ी का फर्नीचर और प्लास्टिक की कुर्सियां आग की लपटों को तुरंत विकराल रूप दे देती हैं। ऊपर की मंजिलों पर हवा का बहाव आग की गति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन बेसमेंट में हवा का क्रॉस-फ्लो न होने से आग और धुआं दोनों ही बेकाबू हो जाते हैं।
हादसा और रेस्क्यू: सुबह 8:50 बजे सूचना मिलने के बाद दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। बेसमेंट में फंसे लोगों को निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान एक दमकल कर्मी घायल हो गया और एक बीमार पड़ गया। यह हादसा एक चेतावनी है कि बेसमेंट की सुरक्षा मानकों को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता।
Delhi: On the Malviya Nagar fire incident, Delhi Fire Services PRO A.K. Malik says, ...We received a call at 8:50 AM, and we mobilized the fire engines by 8:51 AM. Initially, we deployed seven vehicles, but as the volume of calls increased, we increased the number of vehicles… pic.twitter.com/O7dFnBVYPX
— IANS (@ians_india) June 3, 2026
दिल्ली आग कांड: तीसरी मंजिल से छलांग, बिछाए गए गद्दे... फिर भी 18 की मौत
सूर्या चौहान हत्याकांड: कातिल असद के खात्मे के बाद अब खोड़ा में बुलडोजर इंसाफ , अवैध निर्माणों पर चला प्रशासन का चाबुक
सीबीएसई में बड़ा फेरबदल: विवादों के बीच लोखंडे प्रशांत सीताराम बने नए चेयरमैन
शपथ से पहले बड़ा दांव: सिद्धारमैया को मिली नई जिम्मेदारी, कर्नाटक कैबिनेट की तस्वीर साफ
जवानी का गुनाह, बुढ़ापे में सजा: 34 साल पुराने केस में 85 साल के बुजुर्ग को जेल
होमवर्क न करने पर छात्रा का बहाना सुन दंग रह गए टीचर, वीडियो देख आप भी नहीं रोक पाएंगे हंसी!
कुर्सी गई तो क्या, सिद्धारमैया को मिला बड़ा इनाम ; कांग्रेस ने दी नई जिम्मेदारी
भारतीय बेटियों का ऐतिहासिक धमाका: सिंगापुर को 25-0 से रौंदकर सेमीफाइनल में भारत
अलर्ट: देश के 15 राज्यों में मौसम का बिगड़ा मिज़ाज, अगले 3 दिन आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का खतरा
मेट्रो में ‘अहंकार’ की सवारी: सीट पर पैर फैलाकर बैठे यात्री को लोगों ने सिखाया सबक