पटना: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार द्वारा राज्य के मदरसों की जांच के आदेश ने प्रदेश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। इस फैसले के बाद से सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने मोर्चा खोल दिया है।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार के इस कदम को एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाला बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मदरसों की जांच का आदेश केवल एक वर्ग को कठघरे में खड़ा करने की साजिश है।
समान नीति क्यों नहीं? रोहिणी ने सरकार की नीयत पर तंज कसते हुए तर्क दिया कि यदि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है, तो फिर सिर्फ मदरसों को ही क्यों चुना गया? उन्होंने मांग की कि सरकार को सभी अनुदानित शिक्षण संस्थानों, जिनमें संस्कृत विद्यालय और अन्य निजी सहायता प्राप्त स्कूल भी शामिल हैं, उनकी भी समान रूप से निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
संवाद बनाम संदेह की राजनीति रोहिणी ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि शिक्षा सुधार का रास्ता संवाद और संसाधनों को बेहतर बनाने से तय होता है, न कि संदेह और चयनात्मक जांच से। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी कार्रवाई किसी विशेष धर्म या समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह का संदेश न दे।
सामाजिक सौहार्द पर चिंता आरजेडी नेत्री ने कहा कि केवल मदरसों को केंद्र में रखकर की गई कार्रवाई समाज में अविश्वास पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही और पारदर्शिता के नियम सभी शैक्षणिक संस्थानों पर एक समान लागू होने चाहिए।
निष्कर्ष रोहिणी आचार्य के इस बयान ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक पारदर्शिता का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रहा है। फिलहाल, इस जांच के आदेश के बाद राज्य में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर बहस छिड़ गई है।
*मदरसों की जांच का सम्राट सरकार का आदेश स्पष्ट तौर पर एक समुदाय विशेष को कठघरे में खड़े करने जैसा है ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) June 2, 2026
मदरसों की जांच के नाम पर किसी एक समुदाय के शैक्षणिक संस्थान को निशाना बनाना उचित नहीं है। यदि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता ही सरकार का उद्देश्य है, तो सरकार को सभी अनुदानित… pic.twitter.com/bBm5iWXWXl
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